कानपुर। भारतीय क्रिकेट का प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी 11 अक्टूबर से शुरू होगा। सत्र 2026-27 में उत्तर प्रदेश की टीम ग्रुप-ए में आठ अन्य टीमों से भिड़ेगी। यूपी टीम लंबे समय से चले आ रहे खिताब के इंतजार को खत्म करने की तैयारी में है।
उत्तर प्रदेश की टीम ग्रुप-ए में जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, विदर्भ, वडोदरा, पुडुचेरी, गोवा और बिहार से मुकाबला करेगी। यूपी ने अंतिम बार रणजी ट्रॉफी वर्ष 2005-06 में जीती थी। इस बार टीम बेहतर रणनीति के साथ मैदान में उतरने की योजना बना रही है। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने नए सत्र के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की तलाश के लिए पिछले सप्ताह एक शिविर आयोजित हुआ। ग्रीनपार्क और कमला क्लब में दस दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। टीम संयोजन को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। तेज गेंदबाजों को खोजने के लिए प्रतिभा परीक्षण भी आयोजित किया गया है।
उत्तर प्रदेश ने अपना इकलौता रणजी खिताब वर्ष 2005-06 में मोहम्मद कैफ की कप्तानी में जीता था। लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में फाइनल में बंगाल को हराकर यह इतिहास रचा गया था। इसके बाद टीम 2007-08 और 2008-09 सत्र में फाइनल तक पहुंची। तब पूर्व क्रिकेटर ज्ञानेंद्र पांडे टीम के कोच थे, लेकिन टीम ट्रॉफी जीतने से चूक गई थी। इस बार यूपी टीम घरेलू मैदानों पर आक्रामक रणनीति के साथ उतरेगी।
पिछले कई सत्रों में ग्रीन पार्क, मेरठ और लखनऊ जैसे घरेलू मैदानों पर टीम को बराबरी के मुकाबलों से संतोष करना पड़ा था। नए सीजन में अनुभवी खिलाड़ियों को अधिक जिम्मेदारी देने की योजना है। इससे युवा खिलाड़ियों के साथ बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा। यूपी सीनियर टीम के कोच अरविंद कपूर ने टीम में युवा ऊर्जा और अनुभवी खिलाड़ियों के बेहतरीन तालमेल की बात कही है। उन्हें विश्वास है कि यूपी टीम इस सीजन में खिताबी इंतजार खत्म करने में सफल रहेगी।