हैकेथॉन प्रतियोगिता में रामराव कॉलेज ने मारी बाजी
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खदान खुदाई के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रोबोट बनाकर रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रतिभागियों ने आईआईटी कानपुर में चल रही हैकेथॉन प्रतियोगिता पर कब्जा जमाया। टीम लीडर अजीत मुतलिक की अगुवाई में बनाए गए रोबोट ने वाहवाही लूटी और एक लाख रुपये का इनाम भी जीता। विजेता टीम के मेंटर पीएसआईटी के प्रणय वॉल, संजीवनी चखोटे और संदीप सांगले रहे।
पिछले चार दिनों से जारी प्रतियोगिता में इंजीनियरिंग कॉलेज से 12 टीमों ने हिस्सा लिया। छात्र-छात्राओं ने ड्रोन, रोबोट, मेडिकल और कचरा निष्पादन से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए अलग-अलग प्रोटोटाइप किए।
विजेता टीम के अजीत मुतलिक ने बताया कि अंडरग्राउंड कोल माइन मैपिंग सिस्टम को रोबोटिक की मदद से सुधारने का प्रोजेक्ट था। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से दिखाया कि कैसे कोयले की खदान की खुदाई के दौरान टूडी या थ्रीडी मैप नहीं होते हैं। हम नहीं पता लगा सकते हैं कि कहां पर खुदाई की जाए, जो सुरक्षित हो। इस समस्या को सुलझाने के लिए रोबोट की मदद ली जाएगी। जो अंडरग्राउंड मैपिंग करने के बाद 2डी और 3डी मैप दे सकेगा। इससे दुर्घटनाओं से बचाव हो सकेगा।
अजीत ने बताया कि उनके साथ टीम में विनीत मेनन, स्वप्निल पाटिल, तुषार कुरने, श्रद्धा गायकवाड़, अजय लोहार भी शामिल रहे। मुख्य अतिथि एआईसीटीई के रीजनल हेड मनोज तिवारी और आईआईटी कानपुर के ही प्रोफेसर कुमार वैभव श्रीवास्तव ने विजेताओं को पुरस्कृत किया।
स्मार्ट हेलमेट अस्पताल में देगा सूचना
हैकेथॉन में दूसरे स्थान पर आने वाले कर्पगम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग कोयंबटूर, तमिलनाडु ने स्मार्ट हेलमेट और हेल्थ केअर मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया। इसकी मदद से दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। टीम लीडर अम्मूू जे शाहजन ने बताया कि स्मार्ट हेलमेट में ट्रैकिंग सुविधा होगी। जैसे ही व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त होता है तो हेलमेट में लगे ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से इसकी सूचना पास के अस्पताल में पहुंच जाएगी। जैसे ही अस्पताल एंबुलेंस भेजेगा, रोबोट से व्यक्ति की पल्स, बीपी की जानकारी भी अस्पताल को मिल जाएगी। दूसरे स्थान पर आने वाले को 75000 रुपये का इनाम मिला।
दृष्टिबाधित लोगों के लिए बनाई वॉकिंग स्टिक
जाकिर हुसैन कॉलेज इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की प्रियंका गुप्ता ने अपनी टीम के साथ दृष्टिबाधित लोगों के लिए वॉकिंग स्टिक बनाई, जो रास्ते में बाधा आने, पानी, आग आने पर वाइबरेट होेने के साथ अलग-अलग तरह से साउंड करेगी। इससे दृष्टिबाधित लोगों को पता चल सकेगा कि उन्हें रुकना है। साथ ही स्टिक में लेफ्ट, राइट के सिग्नल भी दिए हैं, जो व्यक्ति को साफ रास्ता बताएंगे। इसके अलावा स्टिक में सिम की सुविधा भी है, व्यक्ति एक बटन प्रेस करने के साथ कॉल या एसएमएस कर सकता है। विजेता कॉलेज को 50000 रुपये का तीसरा पुरस्कार मिला।