फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परिवार में ‘लल्ला’ कहकर पुकारे जाते हैं रामनाथ कोविंद

Fri, 21 Jul 2017 09:25 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 4
रामनाथ कोविंद का परिवार
रामनाथ कोविंद को पूरा परिवार लल्ला के नाम से पुकारता है। कोविंद के सिर से बचपन में ही माता पिता का साया उठ गया था। बाद में उनके बड़े भाई मोहन लाल कोविंद और बड़ी भाभी कलावती भी इस दुनिया में नहीं रहीं। पांच भाइयों में सबसे छोटे होने की वजह से रामनाथ के पालन पोषण की जिम्मेदारी उनकी दूसरे नंबर की भाभी विद्यावती कोविंद पर आई। विद्यावती बताती है कि जब वह अपने ससुराल आईं तो रामनाथ करीब पांच या छह साल के थे। तभी से वह उनकी हर पसंद, नापसंद का खयाल करती आ रही हैं। वह आज भी रामनाथ का उसी तरह ध्यान रखती हैं, जैसे बचपन में। मजे की बात यह है कि रामनाथ जब भी कहीं जाते हैं, तो वह विद्यावती को बताना नहीं भूलते हैं। यहां तक कि जब वह पटना में राजभवन से बाहर किसी कार्यक्रम जाते थे तब भी वह अपनी भाभी को बता देते थे। पिछले महीने विद्यावती जब पटना राजभवन गई तो वहां पर वह 14 दिनों तक रहीं। विद्यावती ने बताया कि जब जिस दिन उनको आना था, उस दिन सुबह ही वह उनके पास आए और बोले कुछ दिन और रुको फिर जाना। उनके चौथे नंबर के भाई प्यारेलाल कोविंद और उनकी पत्नी गंगाजलि ने बताया कि उन्हें हर कोई लल्ला ही कहकर अब भी पुकारता है।

 
विज्ञापन

‘सम्मान करब नाहीं भूलो लल्ला’

2 of 4
रामनाथ कोविंद
राष्ट्रपति बने परौंख (डेरापुर) कानपुर देहात रामनाथ कोविंद की छाप आज भी गांव वालों के दिलों में इस कदर है कि हर जुबां उनकी विनम्रता और शिष्टता के चर्चे करते नहीं चूकती। गांव के छोटे-बड़े सभी उनकी चर्चा कर रहे हैं। पैतृक आवास के पड़ोस में रहने वाली और गांव के रिश्ते से दादी 75 वर्षीय शांति ने बताया कि लल्ला (रामनाथ कोविंद) के स्वभाव का तो कोऊ नाहीं हैं। इत्तो बड़ो कद होन के बादौ गांव के बड़े-बुजुर्गन का सम्मान करब नाहीं भूलत हैं। जब कभऊं गांव आवत हैं तो घर आएके आशीर्वाद लेत हैं। 
 
विज्ञापन

जब स्कूटर पर बैठकर निकले प्रचार को

3 of 4
रामनाथ कोविंद के भाई
डेरापुर के परौंख गांव निवासी रामनाथ कोविंद पांच भाइयों में सबसे छोटे हैं। परिजनों के चहेते होने के कारण सभी उन्हें प्यार से लल्ला कहकर बुलाते थे। बचपन से मेधावी और विनम्र स्वभाव के कारण गांव का हर शख्स उन्हें खूब पसंद करता है। शांति बताती हैं कि लल्ला के पिता मैकूलाल के पास जमीन नहीं थी। उन्होंने परिवार के भरण पोषण के लिए घर में ही छोटी सी दुकान खोल रखी थी। वह आयुर्वेदिक दवाइयों से सामान्य बीमारियों का इलाज भी करते थे। इसलिए रोज ही उनके घर पर आस-पास के गांव वालों का आना-जाना रहता था। लल्ला भी स्कूल से आने के बाद दुकान पर बैठा करते थे। जब कोई बड़ा-बुजुर्ग आता तो वह तुरंत ही लोगों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे। इस कारण गांव के ही नहीं बल्कि आस-पास से आने वाले लोगों के भी चहेते बन गए थे।     देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हुए रामनाथ कोविंद ने पहली बार 1991 में घाटमपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा। उस दौरान जब किसी बड़े वाहन का इंतजाम नहीं हो सका तो वह स्कूटर से प्रचार-प्रसार को निकल पड़े थेे। एक दिन में कई-कई गांव घूमकर अपने पक्ष में वोट मांगते थे। उनकी शालीनता और सीधे स्वभाव ने हर किसी को कायल कर रखा था। 

 
विज्ञापन

लल्ला के लिए रसियाउर लेकर राष्ट्रपति भवन जाएंगी विद्यावती

4 of 4
रामनाथ कोविंद परिवार के साथ
रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति शपथ लेने अवसर पर उनके भाइयोें का पूरा परिवार राष्ट्रपति भवन जाएगा। इसकी सूचना भी केंद्र सरकार से इन लोगों के पास आ चुकी है। सभी पूरी तैयारी में जुटे हैें। रामनाथ की बड़ी भाभी विद्यावती अपने लल्ला के लिए रसियाउर (गन्ने के रस में चावल पकाया जाता है) बनाकर ले जाएंगी। उन्होेंने बताया कि लल्ला को रसियाउर बहुत अच्छा लगता है। जब भी वह झींझक या कानपुर आते थे तो रसियाउर बनाने को जरूर कहते थे। अब वह राष्ट्रपति बन गए हैं तो उनके लिए उनके प्रिय भोजन की तैयारी में भी उनका परिवार जुटा है। विद्यावती का कहना है कि लल्ला को सादा भोजन ज्यादा पसंद है। देशी चीजें उन्हें बहुत अच्छी लगती हैं। परिवार के दूसरे सदस्य भी उनके लिए कुूछ न कु छ लेकर जा रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें