आमंत्रित करने के लायक तक नहीं समझा
उनका कहना है कि उनके परिवार को इस लायक भी नहीं समझा गया कि 22 को प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन उन्हें आमंत्रित किया जाए। सुधांशु ने अपनी टूटी फूटी दुकान में अपने पिता का वह चित्र भी लगा रखा है, जब वे आंदोलन के दौरान अयोध्या गए थे।