दोस्तों पिछले दिनों हम कानपुर आये रहे.. दशहरा केर टाइम रहा तो हम गए बर्रा आपन मामा के हिंया.. जैसेहे हम हुंवा पहुंचेन तो देखेन कि हमार मामी बड़बड़ावत रहीं.. हम कहा का भा मामी ? केका गरियाय रही हौ? तो उई कहे लागीं ई रामलीला वालन का..बताओ हम घरे रहिन नहीं ई छूटकई रहीं घरे मा.. हनुमान पार्क रामलीला मंडली वाले आय रहे द्वारे.. कहे लगे कि रामलीला मा सीता अउर मंदोदरी के रोल खातिर धोती दई देव.. ई छूटकई उन लोगन का चार धोती दुई दरी दई दीन्हेन.. हम कहा तो एमा का भा? तो मामी बताईन कि बच्चा धोती तो लौटाय गए.. पर दुई दरी गायब हैं..।
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डेमो पिक
बताओ अब तो रावण जलि गा.. भरत मिलापो हुई गा.. बच्चा ई छूटकई यही लालच मा दै दीन्ह रहैं.. काहे से ऊ कहत रहे कि जब राम सीता की सवारी निकली तो आरती तुमहिं से करवाई जाई..। अभीन नरेसवा का दौड़ावा है कि अभीन जाय के लई के आव.. नहीं तो ई रामलीला मंडली वाले टेम्पो मा लाद के चल देहें.. ई आपन मोहल्ला के ननकऊ घोसी आएं जौन बड़े अगुवा बने फिरत हैं.. का मालूम कौने रामलीला मंडली लई के आवत हैं.. हर साल हमहीं लोगन से सब सामान मांगा करत हैं..। अरे पैसा लेत हैं ई मंडली वाले.. बच्चा ई साल 28 हजार रुपया लीन्हिन रहे हैं..।
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डेमो पिक
पिछली बार बर्रा दुर्गा पार्क मा भई रही अखंड रामायण.. यही ननकऊ कराईन रहे.. ई ननकऊ आपन लौंडन के साथ आवा कि अरे जिज्जी चद्दर दई देव मंच पे पर्दा बनावे का है.. खैर हम कहा अखंड रामायण का मामला होय हम दुई चदरा दई दिहा.. कहिन दुई और दई देव.. ए बच्चा हमरे हिंया से चार चद्दर अउर तीन कुर्सी लई गे रहे.. ये ननकऊ घोसी चारों चद्दर तो लौटाइस पर तीनों कुर्सी तोड़ लावा..।
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डेमो पिक
तबहीं हमार नजर अंदर खटोला पे लेटे मामा केर लरिका मनीष पे पड़ी तो मामी से पूछा कि इनका का भवा.. ई काहे मुंह बाए परे हैं ? तो मामी बताईन कि अरे इनकी ना पूछो बच्चा.. ई कल रात से परे हैं.. तोहार मामा इनका खूब कूटिन हैं..। ई रोज रात मा निकलत रहे रामलीला देखे खातिर.. रात का आठ बजे साइकिल लई के जात रहे.. अउर लौटत रहे रात मा बारह एक बजे.. रोज आय के लीला सुनावत रहे कि आज यो भा आज यो भा..। हमहू कहा चलो रामलीला देखे जात है जाए.. ई तो हम लोगन का पुत्तू तिवारी बताये.. कि चाची तुम्हरा मनीस रामलीला के बहाने हीरपैलेस जात है सनीमा देखैं..।
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डेमो पिक
इनके बाप का तो पहिले से पुत्तू बताय गए रहे.. इनसे पूछे कहा गए रहेव.. ई कहिन रामलीला देखे.. तोहरे मामा पूछीन कि आज का भवा.. तो ई कहिन लक्ष्मणशक्ति भई रही आज.. हनुमान जी गए हैं संजीवनी बूटी ले.. बस ई सुनत भये तोहार मामा इनका जूते से सूत दिहिन.. काहे से ई जब सनीमा देखत रहे तब अंधड़ तूफान आवा रहै.. हनुमान पार्क मा तो रामलीला केर तम्बू पिंडाल सब उड़ी गव रहा.. हम यहू सुना है कि बाबुपुरवा रामलीला केर रावण का पुतला मुंह बल गिरि पड़ा..। इनका सब भेद खुलि गा.. वही मा खूब कूटे गए हैं.. अब कहत हैं खाना देव.. हम कहा सनीमा वालन से मांगो जाए.. बूड़ा बाप आपन खून पसीना एक किये दे रहा है.. उई कमाय कमाय धरें अउर ई हुर्र हुर्र उड़ावें..। हम कहा मामी दई देव लरिका होय.. तो कहे लागीं कि लरिका होई तो का करेजा खवाय दई का.. इनके बप्पा मना किहिन हैं एका खाना दे से..।
हम कहा मामी दई देव खाना.. बच्चा होई तोहार.. तो रुंवासी होय के काहे लाग अरे तो का इनका पता नहीं कि खाना कहां धरा है.. नियामतखाना मा परांठे रखे हैं.. उप्पर छीके पे मक्खन माठा घी रखा है.. ई जानत नहीं हैं का.. अपना निकारे खाएं.. तभी मनीष खाना निकाले खातिर उठे अउर दाल गिराय दिहिन.. तो मामी कहिन रुको.. आईत है.. अच्छा राजू तुमहूं हाथ मुंह धोय लेव.. हम तुम दुइनो का परोस देइत है.. ए मनीसवा रुक जा.. आईत है.. तोका दईत है खाना.. जानित है तुम कल रातै से भुखान हौ.. हम सब जानित है.. माता के दिन चलि रहे हैं.. नवराते मा भूखे ना सोये का चाही.. तोका पैदा तो हमहीं किहेन हंई.. आईत हैऽ !! फिर हमार मामी हमका और मनीष दुईनो का खाना खवाईन.. दोस्तों अईस होत है मां.. जो मां की कदर करै.. समझो स्वर्ग मा आपन प्लाट पक्का करै .. लास्ट मा एक्के बात कहे चाहित है.. कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ..काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है ..।