देवोत्थानी एकादशी 19 नवंबर यानी आज है। मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से जागते हैं। आज के दिन अबूझ मुहूर्त है। देवोत्थानी एकादशी पर गंगा में दीपदान का भी खास महत्व होता है। साथ ही आज के दिन किए गए खास उपायों से अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है। ज्योतिषाचार्य व पं. नरेंद्र दीक्षित बता रहे हैं उन खास उपायों के बारे में...
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भगवान विष्णु 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन चार माह के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में लीन हो गए थे। तभी से मांगलिक कार्य रुक गए थे। मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत देवोत्थानी एकादशी से मानी जाती है।
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देवोत्थानी एकादशी से नारायण पुन: बैकुंठ में पहुंच जाते हैं। इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। हालांकि अभी तारा अस्त है। इस कारण वैवाहिक कार्यक्रम अभी नहीं होंगे। अन्य मांगलिक कार्य होंगे।
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उत्तराभाद्रपद नक्षत्र एवं सिद्ध योग में आज शाम से सभी शुभ योग शुरू हो जाएंगे। देवोत्थानी एकादशी को भगवान विष्णु के लिए एपन से सीढ़ी बनाई जाती है जो कि घर से मंदिर तक जाती है।
अागे की स्लाइड में पढ़ें- अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए विशेष उपाय...
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- एकादशी का उपवास रखें।
- देवोत्थानी एकादशी पर संध्या के समय कपूर आरती करने से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
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- आज से 23 नवंबर तक भीष्म पंचक व्रत हैं। जो इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन में समृद्धि के मार्ग खुल जाते हैं। यह महापुण्यमय व्रत महापातकों का नाश करने वाला है l
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- निःसंतान व्यक्ति पत्नीसहित इस व्रत को करें तो उन्हें संतान कि प्राप्ति होगी।
- मां गंगा की आरती करें। साथ ही दीपदान अवश्य करें।
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- आज से पांच दिनों में अन्न का त्याग करें l कंदमूल, फल, दूध ही लें।
- आज के दिन पूर्णतया ब्रह्मचर्य का पालन करें।