सरकारी मुलाजिमों की लापरवाही बुजुर्गों की परेशानी का सबब बन गई है। पंचायत सचिवों ने बिना घर जाए सत्यापन रिपोर्ट में दो पेंशन धारकों को मृत दर्शा दिया। इससे उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद हो गई। अब वह खुद को जिंदा साबित करते घूम रहे हैं।
कानपुर देहातः पेंशन धारकों का हर वर्ष सत्यापन कराया जाता है। इसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी को दी जाती है। नियमानुसार तो उन्हें लाभार्थी के घर जाकर सत्यापन करने के बाद रिपोर्ट देनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। कई पंचायत सचिव घर बैठ कर गांव के लोगों से फोन पर ही पूछकर मनमानी रिपोर्ट लगा रहे हैं। फिलहाल दो मामले सामने आए हैं।
दोनो मामले सरवनखेड़ा ब्लॉक के हैं। कटेठी गांव की सूरजकली पत्नी स्व. चंद्रभान सिंह ने बताया कि उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिलती है। कई माह से पेंशन बंद होने पर वह समाज कल्याण दफ्तर गई तो वहां पता चला कि वह मर चुकी है। यह सुन वह चौक गई कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि पंचायत सचिव दीक्षा सचान ने अपनी सत्यापन रिपोर्ट में उन्हें मृत दर्शा दिया है। इससे उनकी पेंशन बंद हो गई है।
इसी तरह से सीधामऊ गांव के राजाराम ने डीएम से शिकायत कर बताया कि पंचायत सचिव ने उसे मृत दर्शा दिया। जब इसकी जानकारी पर वह सचिव के पास पहुंचा तो वह उसमें सुधार कराने का भरोसा देने के बजाय जेल भिजवाने की धमकी देने लगा। डीएम ने पूरे मामले की जांच कराने के लिए सीडीओ को निर्देश दिए है। सीडीओ केदारनाथ सिंह ने बताया कि दोनो पंचायत सचिवों से स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा।