फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़: चार महीने से रेलवे चाइल्डलाइन बंद, मुश्किल में बच्चों की निगरानी

Fri, 23 Sep 2022 08:14 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर चार महीने से चाइल्डलाइन काम नहीं कर रही चाइल्डलाइन है। इसके चलते चाइल्ड ट्रैफिकिंग की निगरानी मुश्किल हो रहा है। बता दें कि रेलवे चाइल्डलाइन के 12 सदस्य कानपुर सेंट्रल पर 24 घंटे निगरानी करते थे, लेकिन अभी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
विज्ञापन
कानपुर सेंट्रल - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर पिछले चार महीनों से ट्रेनों से आने वाले नाबालिग बच्चों की निगरानी नहीं हो पा रही है। स्टेशन पर लावारिस बैठे बच्चों को देखने वाला भी कोई नहीं है। यही वजह है कि बच्चों को गायब करने वाले और शोषण करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

विज्ञापन

यह काम बाल संरक्षण के लिए काम करने वाली स्वयं सेवी संस्थाएं प्रदेश सरकार की मदद से करती हैं लेकिन कानपुर सेंट्रल पर काम करने वाली संस्था रेलवे चाइल्डलाइन 18 मई से बंद है। चाइल्डलाइन को चलाने वाली संस्था सुभाष चिल्ड्रेन सोसाइटी को जिला प्रोबेशन अधिकारी ने गंभीर शिकायतों के बाद बंद कर दिया है।
इससे इस एनजीओ से जुड़ा किदवई नगर में सुभाष चिल्ड्रेन होम और कानपुर सेंट्रल पर काम करने वाली चाइल्डलाइन बंद है। 14 सितंबर को एक मां के तीन बच्चों के अपहरण करने का मामला भी निगरानी की कमी की वजह से सामने आया है।

विज्ञापन

सेंट्रल की चाइल्डलाइन पर ताला, सेंट्रल पर घूम रहे बच्चे
रेलवे चाइल्डलाइन बंद होने के बाद रेलवे स्टेशन पर बच्चों की देखरेख करने और उन्हें प्रक्रिया के तहत बाल संरक्षण गृह में दाखिल कराने वाली कोई वैकल्पिक संस्था नहीं है। यह काम जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम कर रही है।

हालांकि यह नाकाफी है, क्योंकि जीआरपी-आरपीएफ दूसरे कामों में व्यस्त रहती है, जबकि चाइल्डलाइन खासकर इसीलिए 24 घंटे के लिए तैनात होती है। कानपुर सेंट्रल पर चाइल्डलाइन की 12 महिलाएं और पुरुष काम करते थे, जो किसी बच्चे को अकेला रोते हुए देखकर।

किसी ट्रेन में छूट जाने की सूचना पर या किसी व्यक्ति या गिरोह के पास संदिग्ध अवस्था में होने पर तत्काल जीआरपी की मदद से उन्हें बचाने का काम करते हैं। चाइल्डलाइन सदस्यों के न होने से इन दिनों बच्चे अकेले इधर-उधर घूमते दिख रहे हैं।

यह होता है चाइल्डलाइन का काम
कानपुर सेंट्रल पर मिले बच्चों को कल्याणपुर में बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाता है। उसके आदेश पर 10 साल से छोटे बच्चों को चिल्ड्रन होम में रखा जाता है। 10 साल से अधिक उम्र के लड़कों को कल्याणपुर के राजकीय बाल गृह और लड़कियों को स्वरूप नगर में राजकीय बालिका गृह में रखा जाता है।

सुभाष चिल्ड्रन सोसाइटी की मान्यता निलंबित होने पर किदवई नगर में सुभाष चिल्ड्रेन होम बंद है। ऐसे में अब 10 साल से कम उम्र के बच्चों के रेलवे स्टेशन पर मिलने पर उन्हें लखनऊ के चिल्ड्रन होम ले जाया जा रहा है। चाइल्डलाइन के न होने से अब यह काम जीआरपी कर रही है।
विज्ञापन

रेलवे चाइल्डलाइन को चलाने वाली संस्था पर कार्रवाई होने से वह बंद चल रही है। रेलवे परिसर में रेलवे पुलिस किसी खोए हुए या लावारिस बच्चों के मिलने पर उन्हें बाल कल्याण समिति के माध्यम से बाल-बालिका गृह में भेज रही है। -जयदीप सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी
 
चाइल्डलाइन अभी काम नहीं कर रही है। चाइल्डलाइन की सूचना पर जीआरपी को सहयोग मिल जाता है लेकिन पहले भी जीआरपी के माध्यम से ही बच्चों को समिति के समक्ष पेश किया जाता था। इसके लिए टीम भी बनाई गई है। -आरके द्विवेदी, थाना प्रभारी, जीआरपी, कानपुर सेंट्रल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें