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हाफिज अब्दुल कुद्दूस भी शहरकाजी

Mon, 08 Feb 2016 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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मौलाना मतीनुल हक ओसामा को कार्यवाहक शहरकाजी घोषित करने के बाद गठित की गई कमेटी ने हाफिज अब्दुल कुद्दूस को शहरकाजी बनाए जाने पर मुहर लगा दी है।
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देवबंदी विचारधारा के बुजुर्ग शहरकाजी मुफ्ती मंजूर अहमद मजाहिरी ने मतीनुल हक का नाम घोषित किया था। हाजी अब्दुल कुद्दूस ने इसका विरोध किया था। रविवार को सिविल लाइंस के रागेंद्र स्वरूप आडिटोरियम में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनारस के मदरसा इस्लामिया के शेखुल हदीस मौलाना अब्दुल्ला नासिर ने उनके नाम का ऐलान किया।

इसी के साथ अब शहर में देवबंदी विचारधारा के दो शहरकाजी हो गए। इसके अलावा बाबूपुरवा की सुफ्फा मस्जिद के इमाम मौलाना आजाद अब्दुल्ला मजाहिरी को नायब शहरकाजी बनाया गया है।
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शहरकाजी मुफ्ती मंजूर मजाहिरी ने मौलाना मतीनुल हक ओसामा को उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसके बाद हाफिज अब्दुल कुद्दूस के पास कार्यवाहक शहरकाजी बनने का विकल्प नहीं था। इसके चलते अब उन्हें सीधे शहरकाजी ही घोषित कराया गया। अमर उजाला ने पहले ही संभावना जता दी थी कि फैसला हाफिज अब्दुल कुद्दूस के हक में ही आएगा।

इसकी वजह थी कि दो फरवरी को गठित की गई सात सदस्यीय कमेटी का गठन हाफिज अब्दुल कुद्दूस के कुली बाजार स्थित मदरसा इशाअतुल उलूम में ही हुआ था। हालांकि इस कमेटी के मुखिया बनाए गए मौलाना मुख्तार अहसन नक्शबंदी और कारी अब्दुल सत्तार जामई कार्यक्रम में पहुंचे नहीं।
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मौलाना मुख्तार ने बताया कि वह शहरकाजी मुफ्ती मंजूर के फैसले का समर्थन करते हैं। हाफिज कुद्दूस के कार्यक्रम में उन्हें बुलाया गया था लेकिन वह गए नहीं।

कार्यक्रम स्थल पर ‘हाफिज कुद्दूस जिंदाबाद, शहरकाजी कैसा हो, अब्दुल कुद्दूस जैसा हो’ के नारे भी लगे। मुस्लिम बुद्धिजीवी मोहम्मद सुलेमान ने समर्थन तो किया है लेकिन दो शहरकाजी होने पर समझ बूझकर फैसला लेने की बात कही। मौलाना नूरुल हुदा, असद इराकी, परवेज अंसारी, अब्दुल माबूद, मोहम्मद अकील शानू, शारिक अल्वी ने इस्तकबाल किया।

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