पंजाबी भाषा की प्रसिद्ध लेखिका व साहित्यकार तारन कौर गुजराल (90) का गुरुवार को पंजाब के मोहाली में निधन हो गया। वह कोरोना संक्रमित थीं। तारन कौर पाकिस्तान में पैदा हुईं औंर बंटवारे के बाद कानपुर के कौशलपुरी के राम विहार में परिवार के साथ बस गईं।
यहां उन्होंने लंबा वक्त गुजारा लेकिन 1984 में हुए सिख दंगों के कुछ सालों बाद वह कानपुर छोड़कर पंजाब चली गईं थीं। उनके पति स्वर्गीय राम सिंह और एक पुत्री रेनू अब इस दुनिया में नहीं हैं। दो बेटे हैं, जो इंग्लैंड में रहते हैं।
जनवादी लेखक संघ के प्रताप साहनी ने बताया कि सिख दंगों के दौरान आजाद हिंद फौज की प्रथम महिला कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने सिख परिवारों को बचाने में काफी मदद की थी। तब से तारन कौर से उनकी नजदीकियां बढ़ीं और वह कैप्टन लक्ष्मी सहगल को बड़ी बहन मानने लगीं।
पंजाबी भाषा के देश में कम ही साहित्यकार हैं। उन्होंने भारत-पाक बंटवारे के बाद परिवारों के दंश झेलने की कहानियां और पंजाबी भाषा की कई मशहूर किताबें लिखी हैं। तारन कौर के निधन की खबर सुनकर उनसे जुड़े लोगों में गहरा शोक व्याप्त है।
साहित्यकार अमरीक सिंह दीप, उनके बेहद करीब रहीं सर्जन डॉ. देविंदर कौर, संध्या त्रिपाठी, प्रताप साहनी, अनीता मिश्रा, भावना मिश्रा, डॉ. ज्योति किरण, डॉ. आनन्द शुक्ल, अलका मिश्रा, रंगकर्मी डॉ ओमेंद्र, उमेश शुक्ल, देवेंन्द्र श्रीवास्तव, शशि श्रीवास्तव मीना पाठक ने दुख जताया और श्रद्धांजलि दी।