कानपुर देहात। भले सरकार कृषि विधेयकों से किसानों को समृद्ध बनाने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बाजार में किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जाती है। गल्ला व्यापारी बेहद कम दाम पर किसानों की उपज खरीदते हैं। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मसले पर किसान सरकार से महज वादा नहीं, बल्कि एमएसपी से नीचे किसी फसल की बिक्री न हो, इस बात की गारंटी चाहते हैं। सरकार कृषि के क्षेत्र में सुधार के नए कार्यक्रमों को लागू करने के लिए जिसे ऐतिहासिक विधेयक बता रही है, दरअसल किसान उस विधेयक को एमएसपी की गारंटी के बगैर बेकार बता रहे हैं।
केस एक
डेरापुर के सब्दलपुर निवासी श्रवण कुमार पाल ने बताया कि गेहूं की फसल पांच बीघा में थी। इसमें करीब 35 क्विंटल गेहूं हो गया था। घर में बचे पांच क्विंटल गेहूं को 15 सितंबर को मुंगीसापुर बाजार में बेचने गए तो वहां व्यापारी ने 15 सौ रुपये प्रति क्विंटल में गेहूं खरीदा। जबकि सरकारी रेट 1925 प्रति क्विंटल है। व्यापारियों की मनमानी से भारी नुकसान हुआ है।
केस दो
डेरापुर के खालिद हुसैन ने बताया कि धान की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार ने 1668 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है। इसके बाद भी मार्केट में किसानों का धान एक हजार से 1200 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। दो दिन पहले घर में रखा छह क्विंटल धान रूरा बजार ले गए। वहां व्यापारी ने धान में नमी आदि का बहाना बताकर प्रति क्विंटल 12 सौ रुपये के हिसाब से खरीदा। सरकार को व्यापारियों पर शिकंजा कसना चाहिए। इससे किसानों का नुकसान न हो।
बोले किसान
बहरी उमरी के किसान शैलेंद्र सिंह कहते हैं कि बाजार में बैठे बड़े गल्ला व्यापारी मनमाने ढंग से छोटे किसानों की उपज खरीदते हैं। इस पर सरकार को शिकंजा कसने की जरूरत है। इससे किसानों का नुकसान होता है। श्यामनगर के श्यामबिहारी ने कहा कि भले सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य नियम को लागू कर दिया हो, लेकिन व्यापारी इस नियम को मानने को तैयार नहीं है। वह आज भी 14-15 सौ रुपये में गेहूं खरीद रहा है। ललपुरवा के किसान भगौती प्रसाद यादव ने बताया कि सरकार की ओर से लागू नियमों का सख्ती से पालन हो तो किसान को नुकसान नहीं होगा। अमूमन देखा जाता है कि नीचे स्तर पर व्यापारी नियमों को दरकिनार कर देते हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान होता है। सरगांव खुर्द के किसान गुड्डा संखवार ने कहा कि कोई भी फसल एमएसपी से कम भाव पर न बिके, खरीद की व्यवस्था किए बगैर एमएसपी की घोषणा से किसानों का भला नहीं होगा। विधेयक में सुधार की जरूरत है।