राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आंदोलनों के नाम पर देश में होने वाली हिंसा की आलोचना की। कहा कि आंदोलन होते हैं। लोग आवेश में आकर ट्रेन, बस समेत तमाम वाहनों में आग लगा देते हैं। यह अच्छी प्रवृत्ति नहीं है। इससे क्षणिक संतोष मिल सकता है, लेकिन ये किसी समस्या का हल नहीं है।
इससे हमारी ही पीढ़ी को कष्ट उठाना पड़ता है। राष्ट्रपति ने उदाहरण दिया कि हम कभी-कभी मांगों को लेकर उग्र हो जाते हैं। मान लीजिये ट्रेन के ठहराव की कोई मांग है तो लोग ट्रेन रोक देते हैं। उसको जला देते हैं। यह बिल्कुल गलत है। कानून के खिलाफ है। जो मांग रखनी हो, शालीनता से रखें। हर जिम्मेदर उसका हल निकालेगा।