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राष्ट्रपति की चिंता: आंदोलनों के नाम पर ट्रेन-बसों में आग लगाना अच्छी प्रवृत्ति नहीं, कही ये बड़ी बात

Sat, 26 Jun 2021 10:24 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर

सार

राष्ट्रपति ने उदाहरण दिया कि हम कभी-कभी मांगों को लेकर उग्र हो जाते हैं। मान लीजिये ट्रेन के ठहराव की कोई मांग है तो लोग ट्रेन रोक देते हैं। उसको जला देते हैं। यह बिल्कुल गलत है। कानून के खिलाफ है।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आंदोलनों के नाम पर देश में होने वाली हिंसा की आलोचना की। कहा कि आंदोलन होते हैं। लोग आवेश में आकर ट्रेन, बस समेत तमाम वाहनों में आग लगा देते हैं। यह अच्छी प्रवृत्ति नहीं है। इससे क्षणिक संतोष मिल सकता है, लेकिन ये किसी समस्या का हल नहीं है।
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इससे हमारी ही पीढ़ी को कष्ट उठाना पड़ता है। राष्ट्रपति ने उदाहरण दिया कि हम कभी-कभी मांगों को लेकर उग्र हो जाते हैं। मान लीजिये ट्रेन के ठहराव की कोई मांग है तो लोग ट्रेन रोक देते हैं। उसको जला देते हैं। यह बिल्कुल गलत है। कानून के खिलाफ है। जो मांग रखनी हो, शालीनता से रखें। हर जिम्मेदर उसका हल निकालेगा।

 
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कहा कि जो लोग ये सोचते हैं कि जिस संपत्ति का वो नुकसान पहुंचा रहे हैं, वो सरकारी है तो गलत है। उनको पता होना चाहिए कि सरकारी चीजें आप लोगों के टैक्स से ही खरीदी जाती हैं। यानी सरकारी चीजें आपकी ही हैं। इसलिए नुकसान भी आपका ही होगा। जरूरी है कि जागरूक बनें और जनहित में जो काम हो, वो करें। 

पांच लाख कमाते हैं पर पौने तीन लाख टैक्स देते हैं
राष्ट्रपति ने कहा कि आप लोग जानते हैं कि देश का सबसे अधिक वेतन वाला कर्मचारी राष्ट्रपति होता है। मगर हम जब पांच लाख कमाते हैं तो पौने तीन लाख रुपये टैक्स भी देते हैं। हंसते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इससे अधिक तो हमारे अधिकारी और जो सामने बैठे शिक्षक हैं वो कमाते हैं। राष्ट्रपति की इस बात पर लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। 

आ गए थे समय पर विलंब से जा रहे हैं
राष्ट्रपति ठीक छह बजे झींझक रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए थे। करीब 20 मिनट तक उन्होंने संबोधित किया। दस से 15 मिनट अफसरों और अन्य लोगों से मिलने-जुलने में लग गए। संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने अपनी घड़ी देखी, तब उन्होंने कहा कि हम आ तो समय से गए थे, लेकिन विलंब से जा रहे हैं।
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