चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में उन्होंने कहा कि एसडी कालेज जाने के लिए इसी पत्थर कालेज से शॉर्ट कट रास्ता मारते थे। उन्होंने कहा कि एसडी कालेज में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता था। तब बीएनएसडी कालेज के छात्रों को आमंत्रित किया जाता था। मैं तब बीएनएसडी में पढ़ता था।
श्रीकृष्ण के बारे में व्याख्यान और पूजा होती थी। रात 12 बजे कृष्ण जन्म होता था। इसके बाद पंजीरी और और चरणामृत मिलता था। पंजीरी दोबारा पाने की कोशिश करता था। मुस्कुराते हुए कहा कि यह बात आपसे शेयर की लेकिन इसका गलत अर्थ यह न निकाले कि मैं प्रारंभिक दिनों में भी इस तरह की चेष्टा करता रहा।
चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में कहा कि इसे पत्थर कॉलेज कहा जाता था। कानपुर मेरी जन्मभूमि है। यहीं से मैंने उच्च शिक्षा भी प्राप्त की है। यहां की यादें मेरे मन में आज भी ताजा हैं। उस समय मैं पैदल कॉलेज जाता था। इसी पत्थर कालेज से अपने कॉलेज के लिए शॉर्ट कट रास्ता अपनाता था।