कानपुर। 1960 तक उत्तर प्रदेश का देश की अर्थव्यवस्था में 14 फीसदी योगदान रहता था। फिर सरकारें बदलीं और धीरे-धीरे यह योगदान केवल सात फीसदी रह गया। यह बीमारू प्रदेश बनकर रह गया लेकिन पिछले आठ वर्षों में प्रदेश तरक्की कर रहा है और एक बार फिर देश में दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। जल्द ही इसे देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने की तैयारी है। यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईआईटी में चल रहे समन्वय कार्यक्रम के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, साइबर सुरक्षा, सस्टेनबिलिटी के साथ कृषि, जल संसाधन पर काम हो रहा है। 2017 में सिर्फ लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में साइबर थाना थे। वर्तमान में सभी 75 जिलों में साइबर थाना और सभी 1583 थानों में हेल्प डेस्क बनी है। महोबा के किसान अब साल में 5,000 नहीं 50,000 रुपये कमा रहे हैं। छह करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे के बजाय सामान्य श्रेणी में आ गए हैं।
ऑडीटोरियम में आयोजित फ्लैगशिप काॅरपोरेट-एकेडमिया समिट समन्वय का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, एमएसएमई मंत्री राकेश सचान, टीसीएस के सीटीओ डॉ. हैरिस विन, संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल व उप निदेशक प्रो. बृजभूषण ने किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 17वीं शताब्दी तक भारत की अर्थव्यवस्था नंबर एक रही। देश ग्लोबल जीडीपी में 25 फीसदी योगदान देता था मगर 1947 तक यह योगदान केवल दो फीसदी ही रह गया। पिछले 11 वर्षों में पीएम नरेंद्र मोदी के प्रयास से भारत दुनिया में चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है जबकि अगले दो वर्षों में तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी है।
पिछली सरकारों में अकादमिक संस्थानों में रिसर्च केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित थीं। सामाजिक सरोकार से कोई लेना देना नहीं था। जबकि अब संस्थान देश की समस्याओं को तकनीक रूप से सुलझाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने आईआईटी के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल के गणितीय मॉडल की तारीफ की। कहा कि सभी में योग्यता है बस सही योजक की जरूरत है। यह कार्यक्रम ऐसे ही योजक का कार्य करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक को बढ़ावा देना जरूरी है लेकिन ध्यान रखें तकनीक को मनुष्य को चलाना है।
आईआईटी कर रहा पोर्ट की सुरक्षा, ऑपरेशन सिंदूर में नहीं आई आंच
निदेशक प्रो. मणींद्र ने कहा कि वैज्ञानिक उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। आईआईटी बंदरगाहों की साइबर सुरक्षा का जिम्मा लिए हुए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पोर्ट को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। गृह मंत्रालय से लेकर विभिन्न मंत्रालयों में लगा ग्रिवांस सेल संस्थान ने तैयार किया है तो प्रदूषण मापने वाली इंडेक्स एक्यूआई भी दिया है। उन्होंने कहा कि अगले साल तक मेडिकल स्कूल बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अलावा अगले साल तक मेडटेक सेंटर भी संस्थान को मिल जाएगा।
शहर की समस्याओं का समाधान के लिए आईआईटी कानपुर के ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन और टीसीएस के बीच एक समझौता भी हुआ। आईआईटी से प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी और टीसीएस से डॉ. हैरिक विन ने हस्ताक्षर किया। डॉ. हैरिक ने बताया कि टीसीएस अपनी गहरी क्षमताओं का उपयोग एआई, रिमोट सेंसिंग, मल्टी-मोडल डेटा फ्यूजन, डिजिटल ट्विन और डेटा एवं नॉलेज के माध्यम से करेगा। इस समझौते से स्मार्ट सिटी की परिकल्पना सही होगी।
समन्वय में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, सस्टेनेबिलिटी व साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञ के रूप में वैज्ञानिक और उद्यमियों ने मंथन किया। लक्ष्य आधारित तकनीक : सीएसआर के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने पर मंथन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि देश के उद्योगों को अत्याधुनिक ड्रोन और क्वांटम तकनीक की आवश्यकता है। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी मांग सस्ती लेकिन अत्याधुनिक ड्रोन और रोबोट तकनीक की है।