कानपुर देहात। सालों से लटकी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी मजबूती के साथ शुरू हो चुकी है। यहां तक की एक माह में 100 से अधिक मरीजों को देखने के प्रति मरीज के हिसाब से डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों को अतिरिक्त रुपये देकर उनकी जेब भारी की जाएगी। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके इसके लिए जिले के आठ सरकारी अस्पतालों में ऑनलाइन परामर्श की सुविधा शुरू कर दी गई है। इससे मरीज का रिकॉर्ड एक ही जगह दर्ज रहेगा। डॉक्टर को बीमारी और पुराने इलाज की जानकारी तुरंत मिल जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और आसान बनाने के लिए सरकार ने आभा आईडी को अनिवार्य कर दिया है। अब सरकार हो या निजी अस्पताल सभी में आभा आईडी जरूरी होगी। इलाज तो दूर की बात इसके बिना ओपीडी की पर्ची ही नहीं बनेगी। दूसरी ओर इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि सालों से सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना किसी न किसी तरह की खामी की वजह परवान नहीं चढ़ सकी। अब इसे हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कोशिशें शुरू हो चुकी हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि अपने और परिवार के सभी सदस्यों की आभा आईडी जल्द से जल्द बनवा लें ताकि भविष्य में इलाज में कोई परेशानी न आए। आभा के नोडल एसीएम डॉ. एसएल वर्मा ने बताया कि जिले में करीब 15.60 लाख आभा आईडी बनाई जा चुकी है। शासन के निर्देश अनुसार मेडिकल के कॉलेज के महिला, पुरुष अस्पताल, सीएचसी अकबरपुर, डेरापुर, रसूलाबाद, पुखरायां, शिवली, सिकंदरा व देवीपुर में शुरू की जा चुकी है। इन अस्पतालों में पर्चा बनने से ओपीडी में परामर्श व पैथोलॉजी की सुविधा ऑनलाइन मिलेगी। जल्द ही इन अस्पतालों के दवा काउंटर पर भी ऑनलाइन सुविधा शुरू की जाएगी।
एसीएमओ ने बताया कि शासन की ओर से माह में आभा आईडी के जरिए 100 से अधिक मरीज देखने पर प्रति मरीज के हिसाब से ऑनलाइन पर्चा बनाने वाले के पांच रुपये, डॉक्टर को ऑनलाइन परामर्श देने पर 20 रुपये व आभा आईडी पर जांच रिपोर्ट दर्ज करने व दवा का ब्योरा दर्ज करने पर एलटी व फार्मासिस्ट को 20-20 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। कुछ समय के अंदर जिले के प्रत्येक सरकारी अस्पताल में आभा आईडी से इलाज की सुविधा मुहैया करवाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद निजी अस्पतालों में यह सुविधा लागू करवाने पर जोर दिया जाएगा।
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क्या है आभा आईडी
आभा आईडी भारत सरकार की डिजिटल हेल्थ योजना के तहत बनाई गई एक हेल्थ पहचान है। 14 अंकों की इस आईडी के जरिये मरीज के इलाज से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। इलाज का रिकॉर्ड एक जगह सुरक्षित रहेगा। बार-बार फाइल और पर्ची दिखाने की जरूरत नहीं होगी। डॉक्टर तुरंत मरीज की बीमारी और इलाज का इतिहास देख सकेंगे। स्वास्थ्य सेवाएं तेज और आसान होंगी। आभा आईडी आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस के जरिये बनाई जा सकती है। इसे किसी भी जन सेवा केंद्र, नजदीकी सरकारी अस्पताल या आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल से आसानी से बनवाया जा सकता है। आभा आईडी के जरिये पात्र अपना आयुष्मान कार्ड व गोल्डन कार्ड भी बनवा सकते हैं।