एक महिला होकर भी एक महिला का दर्द उसने नहीं समझा...ये कहना है आशाबहु किरण का।
एंबुलेंस में जना बच्चा
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एक महिला प्रसव पीड़ा में छटपटाती रही, चींखती रही और डॉक्टर अपने पैसे बनाने में लगी रही। मंगलवार को यह बड़ी लापरवाही उप्र प्रदेश के कानपुर शहर एक जाने माने अस्पताल में सामने आई। ताज्जुब इस बात पर है कि एक महिला डॉक्टर होने के बावजूद उसने एक गर्भवती महिला का दर्द नहीं समझा। ऐसा आरोप है आशाबहु किरण का...
मंगलवार सुबह काशीराम क्लॉनी चकेरी फेज वन निवासी शीला पत्नी अजय कुमार को सुबह 9 बजे काशीराम अस्पताल लाया गया। साथ में आशा बहु किरण भी थी। यहां डॉक्टर ज्योति से उसने इलाज करने को कहा।
अस्पताल में सुविधा न होने की बात कहकर लौटाया
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डॉक्टर ने सुविधा न होने की बात कहकर उन्हें हैलेट अस्पताल चलता करना चाहा। इस पर अजय ने डॉक्टर ज्योति से विनती करते हुए कहा पत्नी की प्रसव पीड़ा बड़ गई है ऐसे में उसे यहां से ले जाना खतरे से खाली नहीं है। इस पर भी डॉक्टर ने एक न सुनी।
इसके बाद अजय पत्नी को एंबुलेंस में लेकर हैलट जाने के लिए निकल पड़ा। बीच रास्ते में महिला की हालत गंभीर होती चली गई। अस्पताल पहुंच भी नहीं पाई थी कि महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा सुरक्षित हैं।
इस मामले के पर आशाबहु किरण से बात हुई तो वह बोली महिला डॉक्टर रुपयों के लालच में इलाज नहीं करती। जो उसे रुपए दे देता है उसका काम हो जाता है और जो नहीं दे पाता उन्हें वह रेफर कर देती है।
राज्य सरकार जहां सबसे लोकप्रिय एंबुलेंस सेवा 102 और स्वास्थ्य सेवाओंं की दुहाई देती रहती है वहीं ऐसे मामले सारी हकीकत बयां कर देते है। यह पहला मामला नहीं है जब किसी महिला ने एंबुलेंस में बच्चा जना हो।