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पूर्व प्रधानमंत्री की हालत बिगड़ने पर कानपुर में शोक की लहर, कुछ ऐसी रही है 'कॉलेज टाइम की कहानी'

Fri, 17 Aug 2018 12:01 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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अटल की तबियत बिगड़ने की खबर सुनकर भर आईं डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा की आंखें
दो महीने से अधिक समय से एम्स में भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई। अटल पिछले कुछ दिनों से वेंटीलेटर पर हैं। अटल की हालत बिगड़ने की खबरें सुनकर कानपुर शहर के लोगों में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। लोग उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। दरअसल अटल के जीवन का महत्वपूर्ण समय कानपुर में बीता था। कानपुर से ही उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। 

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी है  लोगों की प्रतिक्रियाएं...

 
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अटल बिहारी वाजपेई
युग पुरुष 24 घण्टे से वेंटिलेटर पर अटल जी की तबियत बिगड़ी सत्ता का खेल तो चलता रहेगा पार्टियां आएंगी जाएंगी सरकारे बनेंगी बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए - अटल बिहारी वाजपेयी भगवान उन्हें शीघ्र स्वस्थ करे |--- प्रतीक शुक्ला
...हार नही मानुंगा ! यहां तक तो ठीक है पर मेरी भी सुन लो: अटल हो अटल रहो, टलना आपका काम नही ! जल्दी से स्वस्थ हो जाओ, नही तो आपकी बात नही मानूंगा !-----ठाकुर विवेक कृष्णा
पता नही क्यों अटल जी की नाज़ुक तबियत की खबर सुनते ही आँखे भर आईं.. ईश्वर आप को स्वस्थ करें।--- क्रांति कटियार
 
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अटल बिहारी वाजपेई

पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के अति शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।--- संतोष कटारा

टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं इस पहर में सारे देश की दुआऐं आपके साथ है-आप अटल हैं-- रुबिका
 
 

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अटल बिहारी वाजपेई
जीवन में कुछ भी अटल नहीं हैं, आज आज़ादी का जश्न मनाया, और कल..-- सुधीर

डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा की आंखें भर आईं...
 
आगे की स्लाइड में पढ़िए अटल के 'कॉलेज टाइम की कहानी'...
 
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अटल बिहारी वाजपेई
राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ वाजपेयी एक अच्छे कवि और संपादक भी थे। वाजपेयी ने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ब्राह्मण परिवार में 25 दिसंबर, 1924 को इनका जन्म हुआ। पुत्रप्राप्ति से हर्षित पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी को तब शायद ही अनुमान रहा होगा कि आगे चलकर उनका यह नन्हा बालक सारे देश और सारी दुनिया में नाम रोशन करेगा। वाजपेयी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (जो अब लक्ष्मीबाई कॉलेज कहलाता है) और कानपुर (यूपी) के दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज (डीएवी) में शिक्षा ग्रहण की और राजनीति विज्ञान में एम. ए.की उपाधि प्राप्त की।
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अटल बिहारी वाजपेई
सन 1993 मे कानपुर विश्वविद्यालय द्वारा दर्शन शास्त्र में पी.एच डी की मानद उपाधि से सम्मानित किए गए।वाजपेयी की पढ़ाई-लिखाई कानपुर में हुई। वह अपने कॉलेज के समय से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बन गए थे। कानपुर में ही एलएलबी की पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर वाजपेयी राजनीति में पूरी तरह से सक्रीय हो गए। राजनीति में उनका पहला कदम अगस्त 1942 में रखा गया, जब उन्हें और बड़े भाई प्रेम को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 दिन के लिए गिरफ्तार किया गया। 
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अटल बिहारी वाजपेयी
1951 में वाजपेयी भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य थे। उन्होंने 1955 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 1957 में जन संघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया. लखनऊ में वो चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई लेकिन बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से चुनाव जीतकर वे लोकसभा पहुंचे। 1957 से 1977 तक (जनता पार्टी की स्थापना तक) जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे।

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डेमो - फोटो : डेमो
1968 से 1973 तक वे भारतीय जनसंघ के राष्टीय अध्यक्ष पद पर आसीन रहे। 1977 में पहली बार वाजपेयी गैर कांग्रेसी विदेश मंत्री बने. मोरारजी देसाई की सरकार में वह 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया। अटल ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था।  1980 में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की।

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अटल - फोटो : SELF
1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे. दो बार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए। 16 मई 1996 को वो पहली बार प्रधानमंत्री बने। लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा।

इसके बाद 1998 तक वो लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे। अटल बिहारी वाजपेयी अब तक नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं। वे सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी।
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अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी हैं. ‘मेरी इक्यावन कविताएँ’ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। वाजपेयी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे। 
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