नब्बे के दशक की शुरूआत में जब देश के हिंदू किसी भी कीमत पर अयोध्या में राम मंदिर देखना चाहते थे, उस वक्त 1993 के विधानसभा चुनाव में उरई से भाजपा प्रत्याशी रविकांत द्विवेदी के चुनाव प्रचार के लिए अटल जी का कालपी जाना हुआ था। तब उनके संबोधन को सुनने वाले जनसंघ पार्टी के प्रथम नगर अध्यक्ष रहे और वर्तमान में वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश तिवारी के कानों में उनका एक एक शब्द ज्यों का त्यों गूंज रहा है।
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अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी यादें
उरई निवासी रमेश तिवारी बताते हैं कि जनसभा में उन्होंने प्रदेश की सपा सरकार पर न सिर्फ तीखे हमले किए थे, बल्कि रामभक्तों के साथ हुई बर्बरता पूर्वक कार्रवाई का अफसोस भी उनके शब्दों से फूट रहा था।
मंच के सामने भारी भीड़ देख अटल काफी प्रसन्न थे, वर्तमान में कालपी विधायक नरेंद्र सिंह जादौन उस वक्त पार्टी के जिलाध्यक्ष हुआ करते थे। जनसभा की सफलता पर अटल जी ने नरेंद्र और रविकांत दोनों की पीठ भी थपथपाई थी।
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अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी यादें
उन्होंने कालपी की ऐतिहासिक धरोहरों को भी सराहा था। अटल ने कहा था कि आजादी के संघर्ष में कालपी की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। कालपी की जनता ने भी अटल जी का जोरदार स्वागत उनके नाम के नारे लगाकर किया था।
सभा के बाद उन्होंने प्रत्याशी रविकांत को भी जीत के मूल मंत्र दिए और फिर सभा से निकल गए। रविकांत ने बताया कि जब वे माला लेकर अटल जी की ओर बढ़े तो उन्होंने बड़ी विनम्रता के साथ उनके हाथ से माला लेकर उन्हीं के गले में डाल दी और बोले कि डटकर मुकाबला करो।