उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत मेधावी छात्राओं को लाभ देने की प्रक्रिया में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सरकारी निर्देश के मुताबिक कुल उत्तीर्ण छात्राओं में से केवल टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को ही स्कूटी दिए जाने का प्रावधान है। इस मानक के चलते शहर के कई प्रमुख अनुदानित (एडेड) और सहायता प्राप्त कॉलेज इस रेस से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। वहीं, निजी शिक्षण संस्थानों की छात्राएं इस दौड़ में सबसे आगे निकल गई हैं, जबकि अनुदानित कॉलेजों में सर्वाधिक स्कूटी पाने का गौरव पीपीएन कॉलेज के नाम रहा है।
इन कॉलेजों में आवेदन रहे शून्य
शासन और विश्वविद्यालय द्वारा तय किए गए कड़े मानकों के कारण हरसहाय पीजी कॉलेज, हलीम मुस्लिम कॉलेज, अर्मापुर पीजी कॉलेज, डीसी लॉ कॉलेज, प्रो. एचएन मिश्रा कॉलेज, कानपुर विद्या मंदिर कॉलेज, गुरुनानक गर्ल्स डिग्री कॉलेज और दयानंद महिला प्रशिक्षण कॉलेज में स्कूटी के लिए आवेदन शून्य रहे। ये कॉलेज सरकारी मानक को पूरा नहीं कर सके, जिससे इनका खाता तक नहीं खुल पाया।
स्नातक तृतीय वर्ष के परिणामों पर आधारित है चयन
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के अंतर्गत इस वर्ष स्नातक तृतीय वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली मेधावी छात्राओं को स्कूटी प्रदान की जानी है। इस सत्र में कुल 43,934 छात्राएं उत्तीर्ण हुई हैं। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके आधार पर 2,196 मेधावी छात्राओं की अंतिम सूची तैयार की है। विवि अधिकारियों के अनुसार, इस बार स्कूटी पाने वालों में सबसे अधिक संख्या उन्नाव जिले की छात्राओं की है, जिसके मुकाबले कानपुर थोड़ा पीछे छूट गया है।
महाविद्यालयवार स्कूटी पाने वाली छात्राओं की स्थिति
विवि द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कानपुर के विभिन्न कॉलेजों में स्कूटी पाने वाली छात्राओं की संख्या इस प्रकार है:
पीपीएन कॉलेज: 22 छात्राएं
डीबीएस पीजी कॉलेज: 14 छात्राएं
ब्रह्मानंद कॉलेज: 8 छात्राएं
वीएसएसडी कॉलेज: 7 छात्राएं
क्राइस्टचर्च कॉलेज: 5 छात्राएं
जुहारी देवी गर्ल्स पीजी कॉलेज: 5 छात्राएं
डीजी कॉलेज: 4 छात्राएं
ब्रह्मावर्त पीजी कॉलेज: 3 छात्राएं
एसएन सेन गर्ल्स पीजी कॉलेज: 2 छात्राएं