कानपुर ईश्वरीगंज गांव में राष्ट्रपति के आगमन के मद्देनजर अफसरों ने साफ-सफाई के दौरान एक झोपड़ी में आग लगवा दी। महिला रो-रो कर गिड़गिड़ाती रही कि शाम तक वो खुद झोपड़ी हटवा लेगी लेकिन उसकी एक न सुनी।
ईश्वरीगंज में प्राइमरी विद्यालय के पास रामदुलारी का घर है। घर के सामने ही झोपड़ी बनी थी जिसमें वह पांच बच्चों और पति केलिए खाना बनाती थी। गर्मी से राहत मिलने की वजह से पूरी दोपहर बच्चों के साथ झोपड़ी में ही रहती थी। वहां खाना बनाने के लिए लकड़ी का टाल भी लगा हुआ था। दोपहर करीब 12 बजे ग्राम पंचायत के कर्मचारी राम दुलारी के घर गए गंदगी की बात करते हुए झोपड़ी हटाने की बात कही। बिना पूछे ही उसे आग के हवाले कर दिया। कर्मचारियों ने कहा कि ऊपर से दबाव है पूरा गांव साफ-सुथरा दिखाना है। महिला का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। उसने बताया कि पति मजदूरी करता है तिनका-तिनका जोड़कर झोपड़ी बनाई थी, पल भर में उसे खाक कर दिया गया।
राष्ट्रपति आ रहे पर गांव में काम अधूरे
इसी महिला की जला दी गई थी झोपड़ी
कानपुर बिठूर के ईश्वरीगंज गांव में 15 सितंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद स्वच्छता का संदेश देने आ रहे हैं लेकिन गांव में अभी मानक पूरे नहीं हैं। इस गांव को जिला प्रशासन ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) घोषित कर चुका है लेकिन अभी सभी घरों में शौचालय नहीं बन पाए हैं। कुछ प्रशासन ढीला है और कुछ लोग भी जागरूक नहीं हैं। अगर सभी लोग चाह लेते तो हर घर में शौचालय बन जाता।
ईश्वरीगंज ग्राम पंचायत में पृथ्वीगंज, खुशालगंज मजरे भी जुड़े हैं। गांव में 379 परिवार हैं जिनकी आबादी लगभग 1900 है।
गांव को पूरी तरह खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। गांव वालों का कहना है कि अभी कई घरों में शौचालय नहीं बने हैं। प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल 17 अगस्त को ईश्वरीगंज में निरीक्षण करने के लिए गए थे। उन्हें भी गांव को शतप्रतिशत ओडीएफ गांव होने की बात बताई गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि वे लोग वहां शिकायत करने के लिए गए थे लेकिन उनके पास पहुंचने तक नहीं दिया गया। गांव के आखिरी छोर पर स्वर्गीय नरेश चंद्र का परिवार है। घर में तीन बहुएं हैं।
सास केसाथ संगीता, प्रीति और सिया दुलारी रहती हैं। चार परिवार होने के बावजूद भी घर में एक भी शौचालय नहीं बना है। सुनीता देवी केघर में शौचालय तो बना दिया गया लेकिन गड्ढा नहीं बनाया गया। उनका कहना है कि शौचालय बनाने के लिए पैसा ही नहीं दिया गया। शिवकेश कुशवाहा के घर में एक साल पहले ईंट और कुछ सामग्री उपलब्ध कराई गई थी। दीवार तो खड़ी कर दी गई लेकिन शौचालय को पूरा नहीं बनाया गया।
लोगों ने ये कहा...
राष्ट्रपति के आने से पहले तैयारियां
शौचालय बनवाने के लिए कई बार प्रयास किया गया लेकिन प्रधान जी ने स्वीकृति ही नहीं दी। इस बार तुम्हारा नंबर आएगा यही दिलासा दिला रहे हैं।
- रानी कुशवाहा
एक साल पहले निर्माण सामग्री उपलब्ध कराई गई थी। उस समय कुछ काम हुआ था लेकिन अब सिर्फ दीवारें खड़ी हैं। भुगतान न होने से शौचालय बदहाल हो गया। - शिवकेश कुशवाहा
गांव का एक हिस्सा जगमग कर दिया गया है लेकिन एक क्षेत्र अछूता है, यहां न तो सड़क बनाई गई और न ही शौचालय बनवाए गए।
- कुंती देवी
मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार से दो टूक -
सवाल- ओडीएफ गांव के मानक क्या हैं
जवाब- शतप्रतिशत शौचालय बनने और उसका प्रयोग किए जाने पर ही गांव को ओडीएफ माना जाता है।
सवाल- ईश्वरीगंज ग्राम पंचायत को किसने ओडीएफ घोषित किया
जवाब- शौचालय बनने के बाद पंचायती विभाग के एडीओ पंचायत सुशील वर्मा ने जांच पड़ताल की। इसके बाद डिप्टी डायरेक्टर एसके सिंह स्तर पर जांच कराने के बाद प्रधान को ओडीएफ गांव का पत्र दिया गया।
सवाल - गांव में आज भी कई परिवार खुले में शौच कर रहे हैं। क्या विभाग ने इसकी पड़ताल की?
जवाब- गांव में दो बार निरीक्षण कराया गया है। मेरी जानकारी के अनुसार सभी घरों में शौचालय बने हुए हैं।
379 शौचालय बनाने का टारगेट दिया गया था। जिसे पूरा कर दिया गया है। सभी घरों में शौचालय बनवा दिए गए हैं। एक भी घर ऐसा जहां शौचालय नहीं बनाया गया हो।
- आकाश वर्मा, ग्राम प्रधान, ईश्वरीगंज