बिन नागरिकता के बांग्लादेशी (पूर्वी पाक विस्थापित) चुनाव भी लड़ते रहे हैं। पिछले दिनों हुए ग्राम प्रधानी और बीडीसी चुनाव में कई बांग्लादेशियों ने भाग्य आजमाया। एडीएम फाइनेंस/उप जिला निर्वाचन अधिकारी शत्रुघ्न सिंह ने कहा है कि इसकी जांच कराई जाएगी।
लोकसभा में प्रश्न उठने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर 2010 में एसडीएम सदर ने जांच के बाद 194 बांग्लादेशियों (पाक विस्थापित) के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की संस्तुति की थी।
इसके बावजूद वोटर लिस्ट में अभी भी इनके नाम दर्ज हैं। ‘अमर उजाला’ में मामला उठाए जाने पर जिलाधिकारी कौशल राज ने जांच शुरू कराई। तहसीलदार अनिल कुमार की जांच के दौरान यह तथ्य सामने लाया गया कि ग्राम सभा की वोटर लिस्ट में भी इनके नाम दर्ज हैं।
इसी कारण कुछ बांग्लादेशियों ने ग्राम पंचायत और बीडीसी का चुनाव भी लड़ा। ‘अमर उजाला’ ने क्षेत्र में पड़ताल की तो कई स्थानों पर अब भी एक पोस्टर लगा मिला। इसमें ग्राम पंचायत भौंती प्रतापपुर के प्रधान पद की उम्मीदवार को कन्नी पर वोट देने की अपील लिखी थी। इस परिवार को भी बतौर विस्थापित पांच बीघा जमीन मिलने की बात कही गई है।
आवंटित जमीन का तहसील में रिकार्ड ही नहीं
109 विस्थापित बांग्लादेशी परिवारों को आवंटित पांच-पांच बीघा जमीन का तहसील में रिकार्ड ही नहीं है। तहसीलदार अनिल कुमार का कहना है कि तहसील के रिकार्ड में बांग्लादेशी परिवारों को आवंटित जमीन का कोई रिकार्ड नहीं है।
इसलिए दाखिल-खारिज या खतौनी में नाम दर्ज होने का प्रश्न ही नहीं उठता। ज्यादा पानी बरसने और ओले गिरने के दौरान फसलें नष्ट होने पर मुआवजा वितरण के दौरान बांग्लादेशियों ने तत्कालीन डीएम डॉ. रोशन जैकब से तहसील कर्मचारियों द्वारा चेक न देने की शिकायत की थी। तब तहसीलदार ने जिलाधिकारी को रिकार्ड निकालकर दिखाया था।
आयोग ने दिए थे नाम काटने के आदेश
तत्कालीन एसडीएम सदर प्रहलाद सिंह की जांच रिपोर्ट की फाइल देखने से स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग ने जांच के बाद बांग्लादेशियों के नाम काटने को कहा था।
जांच रिपोर्ट में भौती प्रतापपुर भाग संख्या 76 के 151 और भाग संख्या 77 के 43 नाम वोटर लिस्ट से काटने की संस्तुति की थी। तत्कालीन तहसीलदार ने पांच जुलाई 2010 को नाम हटाए जाने की रिपोर्ट दी थी। एसडीएम सदर डीडी वर्मा का कहना है कि बांग्लादेशियों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगेंगे डीएम
कांग्रेस नेता बांग्लादेशियों के साथ जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा से मिलने कलक्ट्रेट पहुंचे। कांग्रेसियों ने डीएम से कहा कि पूर्व पाक विस्थापितों को जमीन दी गई थी। ये लोग करीब 40-42 साल से यहां बसे हैं।
इसलिए वोटर लिस्ट से इनके नाम नहीं हटने चाहिए। एक बांग्लादेशी ने इस दौरान डीएम को अपना पासपोर्ट भी दिखाया। डीएम ने कांग्रेसियों से कहा कि इस पूरे मामले पर वह गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगेंगे। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक भूधर मिश्रा, ग्रामीण कांग्रेस इकाई जिलाध्यक्ष अभिजीत सिंह सांगा और एडवोकेट नरेश चंद्र त्रिपाठी थे।