एसीपी कर्नलगंज को फाइल तलाशने के लिए लगाया था
इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय विपिन कुमार मिश्रा से लेकर एसीपी कर्नलगंज को फाइल तलाशने के लिए लगाया था। फाइल तलाशने के लिए सबसे पहले पुलिस के रिकॉर्डरूम, कोतवाली थाने के सबसे बड़े रिकॉर्ड रूम, डीएम ऑफिस, जिला जज रिकॉर्ड रूम, पुलिस लाइन, बंद हो चुके एसआईएस दफ्तर और संबंधित सभी जगह को खंगाला गया।
फाइल नहीं मिली, तो फाइल रिसीव करने वालों पर ही कार्रवाई
इस दौरान केस से जुड़े दस्तावेज मिले। इससे साफ हो गया कि मामले में फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की गई थी। कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल साहब सिंह ने इसे रिसीव किया था। पुलिस तलाश करते हुए साहब सिंह के बेटे सीएमएम कोर्ट के पेशकार प्रमोद सिंह के पास पहुंची और तस्दीक कराने पर साफ हुआ कि रिसीविंग फाइल पर उसके पिता के ही हस्ताक्षर है। पुलिस अफसरों ने कहा कि अगर फाइल नहीं मिली तो फाइल रिसीव करने वालों पर ही कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इसके बाद सीएममए कोर्ट के पेशकार ने कोर्ट के रिकार्ड रूम से ही फाइल को तलाश करके पुलिस को सौंप दिया।
फाइल तलाशने वालों को मिला इनाम
एसीपी ने बताया कि हत्याकांड के आरोप से जुड़ी फाइल को तलाश करने में उप निरीक्षक अजय कुमार राय, मुख्य आरक्षी विक्रम सिंह, आरक्षी अमित पाल और आरक्षी दीपक महतो ने अहम भूमिका निभाई। इसके चलते पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार की ओर से इन सभी को नगद इनाम की घोषणा की गई है।
एसआईएस ने लगा दी थी फाइनल रिपोर्ट
इसके बाद मामले में तत्कालीन कर्नलगंज थाना प्रभारी रामशरण सिंह ने 18 सितंबर 1991 को चार्जशीट लगा दी। हालांकि तत्कालीन एसएसपी ने मामले की जांच एसआईएस (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल) को सौंप दी। एसआईएस ने मामले में जांच के बाद पाया कि झूठे आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद एसआईएस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।