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प्रदूषण ने बढ़ाई मुसीबत: बिना पीये एक पैकेट सिगरेट का धुआं और गंदगी आपके फेफड़ों में समा रही

Tue, 16 Nov 2021 09:12 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

मेडिसिन विभाग के सीनियर फिजिशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि हैलट ओपीडी में उन्होंने सवा दो सौ रोगी देखे हैं। प्रदूषण से दिक्कत बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि 10 से 15 सिगरेट पीने से जितना फेफड़ों को नुकसान होता है, उतना प्रदूषण से हो रहा है।
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कानपुर का मौसम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदूषण ने शहरवासियों की मुसीबत बढ़ा दी है। बिना पीये एक पैकेट सिगरेट का धुआं और गंदगी फेफड़ों में समा रही है। इससे लोगों में सांस की दिक्कत बढ़ गई है। साथ ही त्वचा की एलर्जी, छींकें, साइनोसाइटिस, आंखों में जलन, पानी आना आदि मर्ज के रोगी बढ़ गए हैं। हैलट, उर्सला और निजी अस्पतालों में रोगियों की भीड़ बढ़ गई है।
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गुर्दा, लिवर, अस्थमा के पुराने रोगियों की हालत बिगड़ रही है। हैलट इमरजेंसी में 17 रोगी भर्ती किए गए। हैलट की ओपीडी में प्रदूषण के कारण बेहोशी आने के पांच रोगी आए। सुबह और शाम को स्मॉग बढ़ने से सांस के एलर्जी के रोगियों की सांस नहीं समाती।

इससे बेहोशी आती है। इसके अलावा सांस में दिक्कत होने से गुर्दा, लिवर और डायबिटीज रोगियों की समस्या बढ़ रही है। मेडिसिन विभाग के सीनियर फिजिशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि हैलट ओपीडी में उन्होंने सवा दो सौ रोगी देखे हैं। प्रदूषण से दिक्कत बढ़ रही है।
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डॉक्टरों का कहना है कि 10 से 15 सिगरेट पीने से जितना फेफड़ों को नुकसान होता है, उतना प्रदूषण से हो रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. एसके कटियार ने बताया कि रोगियों को दिक्कत बढ़ रही है। वैसे तो असर पूरे शरीर पर आता है, लेकिन नाक, गला और फेफड़े सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

ऐसे करें बचाव
- खिड़की, दरवाजे सुबह-शाम बंद रखें
- बाहर का स्मॉग घर के अंदर न आने दें
- घर में अगरबत्ती, कॉइल आदि न जलाएं
- बेवजह बाहर न जाएं, रोगी, बच्चे, बूढ़े स्मॉग के समय घर के अंदर रहें
- बाहर निकलें तो मेडिकल मास्क लगाएं 
- खानपान में एहतियात बरतें, गरिष्ठ भोजन न लें।
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