सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के गांव सैफई में पंचायत चुनाव में पहली बार मतदाताओं को हरा बैलट पेपर दिया गया। आजादी के बाद यहां पहली बार प्रधान पद के लिए मतदान हुआ है। अभी तक निर्विरोध प्रधान चुने जाते रहे हैं।
सैफई गांव में पंचायत की राजनीति से लेकर लोकसभा के चुनावों तक मुलायम सिंह के परिवार का ही दबदबा रहा है। वर्ष 1971 से मुलायम सिंह के बाल सखा दर्शन सिंह यादव निर्विरोध प्रधान चुने जाते रहे हैं। 2020 में उनकी मृत्यु हो गई थी।
इस बार ग्राम प्रधान का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया। 1967 से मुलायम सिंह परिवार से जुडे़े रामफल वाल्मीकी ने सपा की लाल टोपी लगाकर प्रधान पद के लिए पर्चा भरा तो उनके सामने विनीता ने ताल ठोंक दी।
रामफल बाल्मीकी की पत्नी कई बार सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। विनीता टस से मस नहीं हुई। इससे मतदान की स्थिति बन गई। विनीता का रामफल से सीधा मुकाबला हुआ। गांव के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में बनाए गए तीन बूथों पर वोट डाले गए।
बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव, उनके पिता अभय राम सिंह यादव, प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव, महासचिव आदित्य यादव, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अंशुल यादव, उनकी पत्नी स्वीटी यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमलता यादव, सैफई की निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख मृदुला यादव ने मतदान किया।
शिवपाल ने कहा कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव की दिशा तय करेगा। सैफई में रामफल वाल्मीकि ही प्रधान बनेंगे। प्रधान पद के दूसरा नामांकन षडयंत्र के तहत हुआ है, जल्दी ही इसका भी खुलासा किया जाएगा। सपा जिला अध्यक्ष गोपाल यादव ने सपरिवार अपने गांव भदेई काशीराम में वोट डाला।