कानपुर। सिविल लाइंस स्थित रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में शुक्रवार रात दर्पण कानपुर की प्रस्तुति खांचे नाटक के मंचन से समाज को आईना दिखाने का प्रयास किया। बताया कि लोग किस तरह से अपनों से दूर हो रहे हैं। पुलिस की सख्त नाैकरी परिवार से दूरी बना दे रही है। मंचन देखने के लिए ऑडिटोरियम खचाखच भरा रहा।
कलाकारों ने विनायक आचार्य की कहानी खांचे के माध्यम से लोगाें के सामने पुलिस की नाैकरी की मजबूरी रखी। विनायक को पिता को लकवा मार जाता है। इसी बीच डाकिया विनायक के पास डाक लेकर पहुंचता और मिठाई मांगते हुए खाकी रंग की डाक विनायक को देता है। तब पता चलता है कि उसकी पुलिस में नौकरी लग गई। इसी बीच उसकी प्रेमिका की शादी हो जाती है। इसके बाद विनायक अपनी शादी करता है। एक दिन विनायक पत्नी से कहता है कि ड्यूटी के बाद घूमने चलेंगे लेकिन वह समय पर घर नहीं पहुंच पाता, इधर उसकी पत्नी सजधज कर बैठी रहती है। कुछ दिन बाद बेटे का जन्मदिन होता है, उसी दिन विनायक की ड्यूटी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में लगा दी जाती है। ऐसे में वह जन्मदिन में देर रात पहुंचता है तो बच्चा केक जलाकर पिता से गुस्सा होकर चला जाता है। वहीं, नाट्य मंचन के दौरान सभापति डॉ. इंद्र मोहन रोहतगी, महासचिव डॉ. निष्ठा शर्मा, अध्यक्ष प्रो. अभय त्रिवेदी सहित अन्य मौजूद रहे।