बिचौलिये और पुलिस ने आपस में बांट ली रकम
दूसरे परिवार का कहना है कि एक पैसा नहीं मिला। पीड़ितों का आरोप है कि यह बिचौलिये और पुलिस ने आपस में बांट ली। अब इस मामले में डीसीपी ने जांच के आदेश दिए हैं। दरअसल, 28 अक्तूबर की रात उन्नाव की ओर से आ रही बेकाबू कार ने गंगा बैराज स्थित मैगी प्वाइंट पर पांच दुकानों को तोड़ते हुए दो किशोरों को कुचल दिया था। हादसे में कटरी रामपुर निवासी सागर (14) और शुक्लागंज के कलिकामऊ निवासी आशीष (14) की मौत हो गई थी।
वादी ने पूर्व में दिए गए बयान बदल दिए थे
हादसे से नाराज स्थानीय लोगों ने चारों किशोरों को पकड़कर नवाबगंज पुलिस के हवाले कर दिया था। पुलिस ने सागर के बड़े भाई विशाल की तहरीर पर काकादेव निवासी डॉक्टर के बेटे समेत चार पर गैर इरादतन हत्या के बजाय लापरवाही से गाड़ी चलाने की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर चारों को थाने से जमानत दे दी थी। इस संबंध में थानाप्रभारी रोहित तिवारी का कहना था कि वादी मुकदमा ने पूर्व में दिए गए बयान बदल दिए थे। उसने बयान में कहा कि कार में चार किशोरों के अलावा एक और व्यक्ति था, जो कार चला रहा था। हादसे के बाद मौके से भाग गया था।
बिचौलिये के जरिये की थी 15 लाख रुपये में डील
मामले में डीसीपी प्रमोद कुमार ने डॉक्टर से जब पूछताछ की तो उसने बताया था कि मृतक के परिजनों को 15 लाख रुपये एक बिचौलिये आजाद सिंह के जरिये दिए थे। दोनों परिवार को 7.50-7.50 लाख रुपये देने थे। हालांकि बिचौलिये ने आशीष के परिवार को केवल 1.90 लाख रुपये दिए। सागर के परिजनों ने रुपये मिलने की बात से इन्कार कर दिया।
पुलिस की कहानी फर्जी... इन तीन बड़े खुलासों से समझें
1. महज 1.90 लाख रुपये देकर समझौते के कागज में लगवाया अंगूठा
रिपोर्टर: हादसे के बाद क्या कोई अधिकारी आप लोगों से जांच करने या मिलने आया था
आशीष के पिता शिवचरन: रविवार को आजाद सिंह नाम के एक शख्स का फोन आया था। उसने खुद को प्रशासन का प्रतिनिधि बताते हुए गंगा बैराज मिलने के लिए बुलाया।
रिपोर्टर: फिर
शिवचरन: आजाद ने कहा कि मामले में तुम वादी मुकदमा नहीं हो, लेकिन काफी प्रयास कर तुम्हारे लिए प्रशासन से रुपये लेकर आया हूं। जो मिल रहा है ले लो और इस कागज पर हस्ताक्षर या अंगूठा लगा दो।
रिपोर्टर: कितने पैसे दिए आजाद ने
शिवचरण: नहीं, पहले पैसे नहीं दिए। पहले कागज पर साइन करने के लिए आजाद ने थाने चलने की बात कही। मैंने मना कर दिया तो उसने कहा कि यही साइन कर दो, कागज मैं ही पहुंचा दूंगा। इसके बाद उसने पांच-पांच सौ की चार गड्डियां दी। फिर 10 हजार रुपये निकालकर बोला कि यह उसका मेहनताना है।
2. थाने में बिचौलिये ने कहा-कार में पांच लोग थे, पीड़ित ने भी दे दिया यही बयान
रिपोर्टर: चाचा, हादसे के वक्त आप क्या मौके पर मौजूद थे
सागर के पिता मेवालाल: नहीं बेटा, हादसे के समय पर हम वहां नहीं थे। हादसे के बाद रविवार को चौकी इंचार्ज बयान लेने आए थे। फिर बोले, थाने चलो, वहां बयान दर्ज करा देंगे। हम साथ चले गए। वहीं थाने में एक बिचौलिये ने बताया कि कार चार नहीं पांच लोग थे।
रिपोर्टर: तो आपने सिर्फ कही सुनी पर ही पांच लोगों के होने की बात कह दी
मेवालाल: बेटा, मेरे से पहले दरोगा जी ने बिचौलिये के बयान दर्ज किए। उसने अपने बयान में चार की बजाय पांच लोगों के होने की बात कह दी। हमें भी लगा कि वह सही ही कह रहा होगा, इसलिए हमने भी बोल दिया।
रिपोर्टर: तो क्या बयान दर्ज कराने के बाद कुछ पैसे या मुआवजा मिला
मेवालाल: नहीं, कोई पैसा नहीं मिला। बयान दर्ज कराने के बाद चौकी इंचार्ज से मुआवजे के लिए पूछा तो वह बोले, बीस बाइस दिन में मुआवजा मिल जाएगा। लेकिन अब तक एक रुपया नहीं मिला।
रिपोर्टर: क्या आरोपियों के परिवार से कोई पैसा मिला
मेवालाल: नहीं, आरोपी कार सवारों की ओर से कोई पैसा नहीं मिला है। किसी ने कोई पैसा नहीं दिया है।
3. इसके बाद अमर उजाला घटनास्थल पहुंचा जहां कई चश्मदीदों ने पुलिस की चार की बजाय पांच लोगों के होने की फर्जी कहानी को सिरे से खारिज कर दिया:
मैगी प्वाइंट के नजदीक खड़े दो लोगों से रिपोर्टर: आप लोग यही के रहने वाले हैं क्या
युवक: हां, रहने वाले क्या, मैगी प्वाइंट में काम करते हैं। अभी तो बंद है।
रिपोर्टर: क्यों, मैगी प्वाइंट क्यों बंद है
युवक: एक वो हादसे के बाद से पुलिस ने ही बंद करा दिया है।
रिपोर्टर: अच्छा... तो क्या बड़ा हादसा था
युवक: अरे पूछो मत। गाड़ी सीधे सड़क से बगल वाले मैगी प्वाइंट में घुस गई। दो लड़के मर गए बेचारे।
रिपोर्टर: ओह... बड़ा बुरा हुआ। क्या आप लोग यहीं पर थे क्या तब
युवक: और क्या, मेरे सामने ही कार तेजी से आई और कुचल दिया बेचारों को। एक दो लोगों ने तो कूदकर जान बचाई वर्ना तो और कई मर जाते।
रिपोटर: अच्छा। तो क्या कार सवार पकड़े गए या भाग निकले।
युवक: पकड़े तो क्या ही गए, चारों बाहर निकले और आसपास मौजूद लोगों ने पीट दिया। गुस्सा ही इतना आया, अच्छी खासी सड़क छोड़कर यहां चढ़ा दी।
रिपोर्टर: चार लोग थे, या पांच।
युवक: चार थे चार, हम लोगों ने घेर लिया था कार को। चारों पीटे गए।
एक अन्य युवक तपाक से बोला: कार में जो भी था सब पीटे गए, चारो।
रिपोर्टर: सुना था कि पुलिस पांच लोग होने की बात कह रही है।
युवक: पुलिस है, कुछ भी कह सकती है, कर सकती है
पुलिस ने किया धाराओं में खेल, 304ए में रिपोर्ट दर्ज कर थाने से छोड़ा
पुलिस ने डॉक्टर के बेटे और उसके दोस्तों को बचाने के लिए धाराओं में भी खेल किया। पुलिस ने डॉक्टर के बेटे को नामजद करते हुए तीन अज्ञात के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने से मौत की आईपीसी की धारा 304ए में रिपोर्ट दर्ज की थी। कार चला रहे डॉक्टर के बेटे को नामजद करते हुए तीन पर अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की। इससे नाराज किशोरों के परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद चौकी के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया था। तब पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा आईपीसी 304 बढ़ाई जाएगी। हालांकि पुलिस ने 304ए की धारा में ही चालान किया और थाने से छोड़ दिया।
मामला संज्ञान में आया है। विस्तृत जांच एडिशनल डीसीपी को सौंपी गई है। जांच में जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। मृतक के परिवार को हर हाल में न्याय मिलेगा। -प्रमोद कुमार, डीसीपी सेंट्रल