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Kanpur: पुलिस ने पीड़िता से पहचान नहीं कराई, न पर्स किया बरामद...गोली मारकर लूट के तीनों आरोपी बरी, पढ़ें मामला

Tue, 27 Aug 2024 03:42 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कल्याणपुर स्थित महाराणा प्रताप स्कूल के सामने नौ साल पहले वारदात हुई थी। इसमें काली पल्सर सवार तीन युवकों ने लूट के विरोध में ट्यूशन टीचर को गोली मारी थी।
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सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर के कल्याणपुर में नौ साल पहले एक युवती को गोली मारकर उसका पर्स लूटने के मामले में आरोपी तीनों अभियुक्तों को अपर जिला जज नवम शेष बहादुर निषाद ने विवेचना में खामी और पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर बरी कर दिया। विवेचक और सीओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर को निर्देशित भी किया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने पीड़िता से पहचान नहीं कराई, न पर्स बरामद किया ऐसी कई खामियां विवेचना में रहीं।

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कल्याणपुर स्थित महाराणा प्रताप स्कूल के सामने पांच जनवरी 2015 की रात लगभग आठ बजे ट्यूशन पढ़ाकर घर लौट रही युवती का काली पल्सर सवार तीन लड़कों ने पर्स छीन लिया और विरोध पर गोली मार दी थी। पीछे से आ रहे कार सवार ने पुलिस को सूचना दी थी। युवती को हैलट में भर्ती कराया गया था, जहां 22 दिन तक उसका इलाज चला। युवती इतनी दहशत में थी कि उसने रिपोर्ट लिखाने और बदमाशों को पहचानने से भी इन्कार कर दिया था।
इस पर सात जनवरी को एसआई कुलदीप सिंह ने खुद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और कल्याणपुर के न्यू आजाद नगर निवासी शिब्बू सिद्दीकी उर्फ सलमान, आदर्श नगर निवासी अखिलेश सिंह उर्फ शुभम व साहब नगर निवासी विष्णु गौड़ उर्फ अविनाश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तीनों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। अखिलेश के अधिवक्ता राकेश कुमार शुक्ला व शिब्बू और विष्णु के अधिवक्ता न्यायमित्र कैलाश नाथ सैनी ने कोर्ट में उनका पक्ष रखा।

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कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों को दोषमुक्त करार दे दिया
बताया कि पीड़िता ने घटना के समय अभियुक्तों को पहचानने से इन्कार किया था, विवेचक ने चार्जशीट दाखिल करने के पहले शिनाख्त भी नहीं कराई और लगभग चार साल बाद कोर्ट में गवाही के दौरान पीड़िता ने अभियुक्तों को पहचाना जो संदेहास्पद है। कोर्ट को विवेचना में कई खामियां मिलीं। पर्याप्त साक्ष्य न होने पर कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों को दोषमुक्त करार दे दिया।

विवेचक व सीओ पर होगी कार्रवाई
विवेचक ने या तो विवेचना ही गलत की या उसे जानकारी नहीं थी लेकिन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने से पहले संबंधित पुलिस अधिकारी को देखना चाहिए था कि विवेचना सही है या गलत। गलत है तो कमियों को सुधारने के लिए दोबारा विवेचना का आदेश किया जा सकता था। इस मुकदमे में विवेचक और सीओ दोनों ने ही लापरवाही की। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने विवेचक और सीओ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश पुलिस कमिश्नर को दिए हैं।
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विवेचना में मिली ये खामियां
विवेचना के दौरान अभियुक्तों की पहचान पीड़िता से कराने की कोशिश विवेचक ने नहीं की। लूटा गया पर्स व सामान बरामद नहीं किया गया। न तो पीड़िता की बहन को और न ही डायल 100 पर सूचना देने वाले कार सवार व्यक्ति को गवाह बनाया गया। पीड़िता ने गोली से चोट लगने की बात कही जबकि डॉक्टर ने गोली की चोट से इन्कार किया था। पीड़िता 27 जनवरी को अस्पताल से डिस्चार्ज हुई, जबकि शिब्बू व अखिलेश के खिलाफ चार्जशीट 22 जनवरी को ही तैयार कर दी गई। तमंचा, कारतूस व खोखा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा गया था। कोर्ट में जब तमंचा और कारतूस खोला गया तो दोनों अलग थे। कारतूस तमंचे के अंदर नहीं जा रहा था।
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