कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों को दोषमुक्त करार दे दिया
बताया कि पीड़िता ने घटना के समय अभियुक्तों को पहचानने से इन्कार किया था, विवेचक ने चार्जशीट दाखिल करने के पहले शिनाख्त भी नहीं कराई और लगभग चार साल बाद कोर्ट में गवाही के दौरान पीड़िता ने अभियुक्तों को पहचाना जो संदेहास्पद है। कोर्ट को विवेचना में कई खामियां मिलीं। पर्याप्त साक्ष्य न होने पर कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों को दोषमुक्त करार दे दिया।
विवेचक व सीओ पर होगी कार्रवाई
विवेचक ने या तो विवेचना ही गलत की या उसे जानकारी नहीं थी लेकिन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने से पहले संबंधित पुलिस अधिकारी को देखना चाहिए था कि विवेचना सही है या गलत। गलत है तो कमियों को सुधारने के लिए दोबारा विवेचना का आदेश किया जा सकता था। इस मुकदमे में विवेचक और सीओ दोनों ने ही लापरवाही की। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने विवेचक और सीओ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश पुलिस कमिश्नर को दिए हैं।
विवेचना में मिली ये खामियां
विवेचना के दौरान अभियुक्तों की पहचान पीड़िता से कराने की कोशिश विवेचक ने नहीं की। लूटा गया पर्स व सामान बरामद नहीं किया गया। न तो पीड़िता की बहन को और न ही डायल 100 पर सूचना देने वाले कार सवार व्यक्ति को गवाह बनाया गया। पीड़िता ने गोली से चोट लगने की बात कही जबकि डॉक्टर ने गोली की चोट से इन्कार किया था। पीड़िता 27 जनवरी को अस्पताल से डिस्चार्ज हुई, जबकि शिब्बू व अखिलेश के खिलाफ चार्जशीट 22 जनवरी को ही तैयार कर दी गई। तमंचा, कारतूस व खोखा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा गया था। कोर्ट में जब तमंचा और कारतूस खोला गया तो दोनों अलग थे। कारतूस तमंचे के अंदर नहीं जा रहा था।