व्यक्तिगत हाजिरी का पैतरा कोर्ट में चला
इसकी सुनवाई 25 सितंबर को है। दिवाकर की गिरफ्तारी के लिए कमिश्नरी पुलिस ने अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान उसकी व्यक्तिगत हाजिरी का पैतरा कोर्ट में चला। अब भाजपा नेता की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने अपना जाल बिछा दिया है। कचहरी के आसपास सादे कपड़ों में पुलिस कर्मियों की तैनाती का खाका तैयार किया गया है, ताकि बचने की आशंका न रहे।
हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर कोई राहत न मिल सके
इधर, सेशन कोर्ट से राहत की उम्मीद पर पानी फिरता देख दिवाकर ने हाईकोर्ट का रुख किया और एफआईआर खारिज कराने के लिए याचिका दाखिल की है। जानकारी मिलने पर पुलिस के आला अफसरों की टीम याचिका के विरोध में मजबूत साक्ष्यों सहित जवाब हाईकोर्ट में दाखिल करने की तैयारी कर रही है, ताकि दिवाकर को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर कोई राहत न मिल सके।
पुलिस इस कानून का करेगी इस्तेमाल
हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव दीक्षित का कहना है कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 438-1(b) के तहत यह व्यवस्था है कि अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अगर अभियोजन अधिकारी याची को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में बुलाने की मांग करता है, तो न्याय हित में कोर्ट अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर अंतिम सुनवाई या आदेश जारी करने के समय याची को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दे सकती है, और याची को कोर्ट में हाजिर होना अनिवार्य होगा। ऐसे में जब अभियुक्त कोर्ट में हाजिर होने आएगा तो पुलिस उसे बाहर से गिरफ्तार कर सकती है।
मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखकर प्रियरंजन की गैंग समेत गिरफ्तारी की मांग
बाबू सिंह की पत्नी बिटान व दोनों बेटियों रूबी और काजल ने शनिवार को न्याय संघर्ष समिति की अगुवाई में अपने खून से मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखकर न्याय की मांग की। इस दौरान संयोजक अभिमन्यु गुप्ता और फतेह बहादुर गिल ने कहा कि किसान बाबू सिंह यादव की आत्महत्या के 15 दिन बाद भी मुख्य आरोपी भाजपा नेता प्रियरंजन आशु के पकड़े न जाने से सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। रूबी, काजल ने खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से पूछा कि हमको अनाथ बनाने वाले भाजपा नेता प्रियरंजन आशु, भाजपा नेता शिवम चौहान और उसके गैंग को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रहे। इस दौरान अंकुश यादव, मोनू शर्मा मौजूद रहे।