कोतवाली प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि गैंगस्टर गिरिजा शंकर मिश्रा के खिलाफ गंगाघाट कोतवाली में वर्ष 2016 में गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। वर्ष 2003 में पहला पाक्सो एक्ट में मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा धोखाधड़ी, मारपीट, सरकारी जमीन के मामले समेत अन्य धाराओं में एक दर्जन से अधिक मामले कोेतवाली में दर्ज है। हाल में ही सरकारी कुर्क जमीन को बेचने के मामले में जाजमऊ चौकी प्रभारी राजेश सिंह की तहरीर पर गिरिजा शंकर मिश्रा, रामलखन, बृजेश निषाद, सुभाष यादव, रंजीत निषाद, वीरेंद्र कुमार, उमेश कुमार, मनोज कुमार, संजय निषाद, विजय कुमार, वीरेंद्र पाल, मुन्नी लाल, योगेंद्र मिश्रा सहित 13 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पहले भूमाफिया दिव्या अवस्थी के लिए करता था काम
गैंगस्टर गिरिजा शंकर मिश्रा पांच साल पहले भूमाफिया व पत्रकार हत्याकांड के मामले में जेल में बंद दिव्या अवस्थी के लिए जमीन के धंधे में काम करता था। यहीं से उसने जमीन की हेराफेरी करने के गुर सीखे और सरकारी जमीनों को बेचने का खेल किया। दिव्या अवस्थी के पत्रकार हत्याकांड में जेल जाने के बाद कमान गिरिजा शंकर ने संभाली, लेकिन गिरिजा ने यहां दिव्या कंपनी को किनारे करते हुए अपना गिरोह बना लिया। लोगों की जमीन कब्जाने के साथ ही सरकारी जमीनों को बेचने लगा। उसका रुतबा एक नेता से नजदीकी बढ़ाने के बाद ज्यादा बढ़ गया, इसके बाद उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
पांच वर्षों में बनाई अकूत संपत्ति, पोनी रोड पर मॉल बनाने की थी तैयारी
गैंगस्टर गिरिजा शंकर मिश्रा पांच वर्षों में अकूत संपत्ति का मालिक बन चुका है। सूत्रों के मुताबिक वह कानपुर के जाजमऊ के बड़े भूमाफिया व गैंगस्टर नसीम व नौशाद लारी के संपर्क में भी कुछ दिनों तक रहा है। इसके बाद एक के बाद एक उसने पोनीरोड, कटरी पीपरखेड़ा, मझरा पीपरखेड़ा ग्राम सभा स्थित कई जमीनों को खरीदा। हाल में ही पोनीरोड में करोड़ों की कीमत की जमीन खरीद कर वहां मॉल बनाने की तैयारी में था। इसके अलावा कानपुर और लखनऊ के आस पास भी कई अचल संपत्ति होने की बात चर्चा में है। गिरिजा के गिरोह में लगभग आधा सैकड़ा लोग शामिल है। कोतवाली पुलिस का कहना है कि शामिल लोगों की सूची बनाई जा रही है। जल्द ही रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की जा सकती है।