कानपुर देहात। बिकरू कांड की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को 30 आरोपियों को केस डायरी की छाया प्रति दी गई। सभी आरोपी कोर्ट में उपस्थित रहे। छाया प्रति मिलने के बाद अब आरोप निर्धारण पर बहस होगी। इसके लिए कोर्ट ने 13 दिसंबर की तिथि तय की है। सात आरोपियों को पहले ही छाया प्रति उपलब्ध कराई जा चुकी है।
बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 को कुख्यात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर फायरिंग की गई थी। इसमें सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट सुधाकर राय की अदालत में चल रही है। शुक्रवार को कोर्ट ने केस डायरी की छाया प्रति मांगने वाले 30 आरोपियों को तलब किया था।
इसमें चौबेपुर के तत्कालीन एसओ विनय तिवारी, दरोगा केके शर्मा, संजय दुबे, बालगोविंद दुबे, शशिकांत पांडेय, शिवम दुबे समेत 29 आरोपी माती जेल से कोर्ट ले जाए गए जबकि एक आरोपी दयाशंकर को कानपुर जेल से लाया गया था। कड़ी सुरक्षा में सभी को कोर्ट में पेश किया गया।
केस डायरी की फाइल बड़ी होने की वजह से उसे छह सेट में विभाजित कर अलग-अलग कर दिया गया था। सभी आरोपियों को केस डायरी के छह-छह सेट रिसीव कराए गए। कोर्ट ने केस डायरी को पढ़ने व समझने के बाद अधिवक्ता के माध्यम से पक्ष रखने के लिए कहा। साथ ही ये भी कहा कि अगर कोई बंदी अधिवक्ता करने में सक्षम नहीं है तो उसे नियमानुसार विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाएगा।
कोर्ट के बाहर बंदियों से मिलने के लिए उनके परिजन डटे रहे। पुलिस उन्हें लगातार कोर्ट परिसर से बाहर करती रही। वहीं हवालात की तरफ कड़ी निगरानी रखी गई। सहायक शासकीय अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि अब 13 दिसंबर को सुनवाई होगी।
पूर्व एसओ बोला पुलिस ने गलत फंसाया
बिकरू कांड की सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से प्रत्येक आरोपी को व्यक्तिगत रुप से केस डायरी दी गई। कोर्ट के सामने आते ही आरोपी खुद को निर्दोष बताने लगे। इस पर कोर्ट ने केस डायरी को पढ़ने के बाद अधिवक्ताओं के माध्यम से आरोप निर्धारण पर बहस के दौरान पक्ष रखने के लिए कहा। घटना के समय चौबेपुर में बतौर एसओ तैनात रहे विनय तिवारी व दरोगा केके शर्मा को भी कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट के सामने आते ही दोनों ने पुलिस पर ही गलत फंसाने का आरोप लगाया। कोर्ट ने सभी की बातें गंभीरता पूर्वक सुनीं। (संवाद)