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चिप से पेट्रोल चोरी: जानिए कब से शुरू हुआ खेल, यूपी पुलिस भी दोषी

Tue, 02 May 2017 12:16 AM IST
हिमांशु गुप्ता, अमर उजाला, कानपुर
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लखनऊ में पेट्रोल पंप पर चिप लगाकर घटतौली का मामला सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में सनसनी है। पंजाब पुलिस ने डेढ़ साल पहले ही इस तरह के मामले का खुलासा कर यूपी पुलिस को आगाह किया था। पर यूपी पुलिस ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।इससे प्रदेश में नेटवर्क फैलता चला गया। इस काले धंधे की शुरुआत यूपी के छोटे से ज‌िले औरैया से हुई थी। चिप लगाने वाले गिरोह का सरगना औरैया के एक पेट्रोल पंप पर काम करता था। यहीं से उसने अपना नेटवर्क फैलाया। पंजाब पुलिस ने उसे धर दबोचा था। बताया जाता है कि सरगना अब जमानत पर बाहर है। सूत्रों के मुताबिक उसने पुराने एजेंटों के सहारे यूपी में फिर से नेटवर्क खड़ा कर लिया है।
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पंजाब-हरियाणा में पुल‌िस ने क‌िया था गिरोह का पर्दाफाश

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करीब डेढ़ साल पहले पंजाब के मानसा जिले की पुलिस ने पंजाब और हरियाणा में पेट्रोल पंप पर चिप लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। मानसा जिले के तत्कालीन एसएसपी नरेंद्र ज़ार्गव ने गिरोह का खुलासा किया था। खुलासे में सामने आया था कि कानपुर का अंकुर वर्मा औरैया के पेट्रोल पंप पर काम करता था। यहीं से उसने नेटवर्क फैलाया था। पहले वह कानपुर की एक कंपनी में काम करता था। इंटर पास होने के कारण उसे कंपनी से निकाला गया था। इसके बाद वह औरैया के एक पेट्रोल पंप पर नौकरी करने लगा। यहीं से उसने पेट्रोल पंप पर चिप और रिमोट लगाकर ट्रायल लिया। सफल होने पर उसने यहीं से ही यूपी, पंजाब व हरियाणा में अपना जाल फैलाया। तीनों प्रदेशों में जाल फैलने के बाद वह पेट्रोल पंप से नौकरी छोड़कर चला गया। पंजाब की मानसा जिले की पुलिस ने घटतौली की शिकायताें पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। कई एजेंटों को धर दबोचा था। इससे अंकुर वर्मा भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया था। पूछताछ में अंकुर ने स्वीकार किया था कि यूपी व हरियाणा के पेट्रोल पंपों पर उसने चिप व रिमोट सप्लाई किए हैं। इस पर पंजाब पुलिस ने यूपी को आगाह को किया था। यूपी पुलिस ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे यूपी में पेट्रोल पंपों पर घटतौली का नेटवर्क फैल गया। सूत्र बताते हैं कि अंकुर पंजाब से जमानत पाकर बाहर है। उसने यूपी में फिर से अपना नेटवर्क फैला दिया है। 
 

दो तरह से काम करती है चिप 

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तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक पेट्रोल पंप पर लगने वाली चिप दो तरह से काम करती है। एक चिप रिमोट से तो दूसरी चिप कोड से काम करती है। दोनों चिपों के अलग-अलग रुपये लगते हैं। रिमोट वाली चिप 40 से 50 हजार रुपये में मिलती है। कोड वाली चिप की कीमत बीस से तीस हजार रुपये है।
इस तरह काम करती है कोड वाली चिप 
रिमोट वाली चिप पंप के मीटर की पल्स बढ़ा देती है। पेट्रोल या डीजल के लिए पंप शुरू करने पर मीटर रीडिंग दस से शुरू होकर बीच के अंक छोड़ते हुए आगे बढ़ती है। कोड वाली चिप में फीड किया जाता है। इसमें दस, बीस या पचास लीटर पर या फिर सौ, दो  सौ और पांच सौ रुपये फीड किए जाते हैं। अगर कोई दस, बीस या पचास लीटर या इस क्रम में पेट्रोल या डीजल डलवाता है तो उसमें घटतौली की जा सकती है। या फिर कोई सौ, दौ सौ और पांच सौ रुपया का पेट्रोल या डीजल डलवाता है तो वह भी घटतौली का शिकार हो सकता है। 

ए, बी और सी करके पड़ता है कोड 

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 चिप में ए, बी और सी कोड हैं। एक लीटर पर आठ रुपये की चपत लगाती है तो ए कोड सेट किया जाता है। अगर छह रुपये की चपत लगानी है तो बी सेट किया जाता और चार रुपये की चपत लगाने में सी सेट किया जाता है। 
औरैया में पंजाब पुलिस ने की थी छापेमारी 
पंजाब में पेट्रोल पंप पर घटतौली के बाद गिरोह का भंडाफोड़ करने के लिए पंजाब पुलिस ने 2015 में भी औरैया में कई बार छापेमारी की। बाद में अंकुर वर्मा का अड्डा तलाश कर उसे दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया था। 
 
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बिना उपकरण का विभाग, नपने से माप

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पेट्रोल पंप पर घटतौली की जांच करने का जिम्मा बांट मांप विभाग के पास है। विभाग के पास चिप और रिमोट पकड़ने के लिए कोई यंत्र नहीं है। नपने में पांच लीटर डीजल और पेट्रोल डालकर माप करते हैं। नापने के दौरान रिमोट से चिप बंद कर दी जाती है। इससे घटतौली पकड़ में ही नहीं आती। बांट-माप अधिकारी हरीश कुमार बंसल ने कहा क‌ि पेट्रोल पंपों पर घटतौली की जांच करने के लिए सिर्फ पांच लीटर का नपना है। चिप की जांच करने के लिए विभाग की ओर से उपकरण मुहैया नहीं कराए गए हैं। इससे नपना ही जरिया है। विभाग चिप की जांच के लिए कोई उपकरण  मुहैया कराता है तो उसका भी प्रयोग जांच के दौरान किया जाएगा।
                    
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