मौजूदा दौर में मुस्लिम समाज को हिदायत दी कि वह आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट हों और मौजूदा हालात का सामना करें। किसी भी देश में अल्पसंख्यक समाज को ज्यादा फिक्र, तवज्जो और और मेहनत करने की जरूरत होती है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का 27वां अधिवेशन शनिवार को जाजमऊ स्थित मदरसा डीटीएस में शुरू हुआ। दो दिवसीय इस अधिवेशन में देशभर के करीब 140 उलमा और मुस्लिम बुद्धिजीवी बतौर बोर्ड मेंबर शामिल हुए।
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बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में मौजूदा दौर में मुस्लिम समाज को हिदायत दी कि वह आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट हों और मौजूदा हालात का सामना करें। किसी भी देश में अल्पसंख्यक समाज को ज्यादा फिक्र, तवज्जो और और मेहनत करने की जरूरत होती है।
यह तब और बढ़ जाती है, जब अल्पसंख्यक समाज को कमजोर करने की कोशिशें हुकूमतों की तरफ से की जा रही हों। उनके इस भाषण के बाद तमाम सदस्यों ने अपनी-अपनी हामी भी भरी। मौलाना राबे ने कहा कि शिक्षा, अपनी बात और अधिकार को प्रसारित करने के लिए माध्यमों की जरूरत होती है।
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किसी भी काम को मेहनत कर हासिल किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात है कि मुसलमान आपसी मतभेदों को विरोध तक न पहुंचने दें। इस वक्त मुस्लिम समाज इसी समस्या का शिकार है। इससे नुकसान हो रहा है। समाज की एकता हिम्मत और कुर्बानी चाहती है।
तमाम बार जो काम होश से होना चाहिए, उसकी जगह जोश ले लेता है। कहा कि जो काम खामोशी से हो सकते हों, उनका प्रचार करने जरूरत नहीं है। इससे तमाम बार मामले खराब हुए हैं और नाकामी भी हाथ आई है।