फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: एंबुलेंस और स्कूटर को भी जारी किए खनिज ढोने के परमिट, बिना लाइसेंस के चल रहे स्टोन क्रेशर; कैग ने खोली पोल

Thu, 21 Aug 2025 02:36 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बांदा

सार

बांदा में एंबुलेंस और स्कूटर को भी खनिज ढोने के परमिट जारी कर दिए। बिना लाइसेंस के स्टोन क्रेशर चल रहे हैं। बुंदेलखंड में खनिज की लूट-खसोट की कैग ने पोल खोल दी है।
विज्ञापन
जनपद बांदा में नदी में हो रहा बालू का खनन। (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बुंदेलखंड में बालू और पत्थर (पहाड़) के खनन को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। हाल ही में जारी हुई कैग (सीएजी) की वर्ष 2016-17 से 2021-22 की पंचवर्षीय रिपोर्ट में चित्रकूट मंडल के चारों जिलों (बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा) सहित प्रदेश के 17 जनपदों में अवैध खनन और ओवर लोडिंग का खुलासा हुआ है। 
विज्ञापन


जांच में यह भी सामने आया है कि बालू-पत्थर की ढुलाई के लिए बड़े वाहनों के नाम पर स्कूटर, एंबुलेंस और ई-रिक्शा को भी ईएमएम-11 परमिट जारी कर दिए गए। इसके पूर्व भी कैग अपनी रिपोर्टों में बुंदेलखंड में अवैध खनन को लेकर आपत्तियां जता चुका है। 

पिछले हफ्ते जारी की गई रिपोर्ट हाल ही में विधानसभा सत्र में भी पेश की गई है। अन्य मुद्दों के साथ इसमें अवैध खनन को प्रमुखता से उजागर किया गया है। रिपोर्ट में बालू खदानों और पहाड़ों में अवैध खनन तथा बगैर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के चल रहे स्टोन क्रेशर कैग के निशाने पर रहे। 
विज्ञापन


लगभग 148 पेज की अंग्रेजी में तैयार रिपोर्ट में बताया गया कि बांदा में 45.48 हेक्टेयर में क्षेत्रफल में अवैध खनन हुआ है। इसके बाद हमीरपुर में 6.18 हेक्टेयर भूमि में अवैध खनन की बात कही गई है।

अवैध खनन और ओवर लोडिंग का जिक्र
बांदा में अवैध खनन तिंदवारी, पैलानी, बांदा, नरैनी तहसील क्षेत्रों में बताया गया है। हमीरपुर में सरीला और चंदवारी क्षेत्रों में अवैध खनन और ओवर लोडिंग का जिक्र है। 

 

अवैध रूप से चल रहे स्टोन क्रेशर
एनजीटी, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की रोक के बावजूद बुंदेलखंड में बालू का अवैध खनन और अवैध रूप से स्टोन क्रेशर चल रहे हैं। अधिकांश क्रेशर के पास एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं है। 

बिना भंडारण लाइसेंस के चल रहे क्रेशर
कैग की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर सहित प्रदेश के 17 जिलों में खनन की जांच की गई है। चित्रकूट मंडल के चारों जिलों समेत प्रयागराज, सोनभद्र और सहारनपुर में कुल 1035 स्टोन क्रेशर पाए गए।

इनमें 613 क्रेशर बिना भंडारण लाइसेंस के चलते मिले। इससे प्रदेश सरकार को तकरीबन 61 लाख रुपये से ज्यादा शुल्क राजस्व का नुकसान पहुंचा। हमीरपुर में दो खनन परमिट का गलत भू-निर्देशांक पाया गया।

नदियों की जलधारा में खनन की अनुमति
कैग रिपोर्ट के मुताबिक बांदा में अछरौड़ और दादों खादर गांवों में बालू खनन के पट्टे नदी पुलों के नजदीक दे दिए। यह एनजीटी नियमों के विपरीत है। अछरौड़ का पट्टा फरवरी 2026 और दादों का पट्टा अप्रैल 2027 तक के लिए दिया गया है। कैग ने एनजीटी नियमों का हवाला देकर नदियों की जलधारा में बालू खनन के पट्टे/अनुमति दिए जाने पर भी आपत्ति जताई है।

लखनऊ से जारी होते हैं खनिज ढोने के परमिट
चित्रकूट मंडल सहित प्रदेश के 17 जिलों में ऐसे वाहनों को भी ई-एमएम- 11 परमिट जारी कर दिए गए जो वाहन खनिज परिवहन के योग्य या उपयुक्त नहीं थे। इन वाहनों में स्कूटर, बाइक , ई-रिक्शा , एंबुलेंस आदि शामिल हैं। परिवहन विभाग से क्रास मिलान में यह पोल खुली।
विज्ञापन

चित्रकूट मंडल के अलावा ऐसा करने वाले अन्य जनपदों में फतेहपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, प्रयागराज, बुलंदशहर, संभल, सहारनपुर आदि जिले शामिल हैं। बालू-पत्थर खनिजों के परिवहन के लिए यह परमिट/प्रपत्र खनिज , निदेशालय (लखनऊ) जारी करता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें