शाहजहांपुर में बहन वर्णिका से वीडियो काल से हाल लेता रूपेश एंव वीडियो चैट से आपस में बातचीत करते शिवम, अभिनव, सत्यम और नताशा स्तारकोवा
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मै उसके घर नहीं जाता, वो मेरे घर नहीं आता, मगर इन एहतियातों से ताल्लुक मर नहीं जाता। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते उपजे हालातों में लॉकडाउन की घोषणा होने को लेकर वसीम बरेलवी का यह शेर सटीक बैठता है। दरअसल विभिन्न अध्ययनों और दूसरे देशों में उपजे हालातों से यह साफ तौर पर पता चल चुका है कि कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए सामाजिक दूरी बेहद जरुरी है।
लॉकडाउन के दौरान पूरे देश और समाज के हित में लोग एक दूसरे के संपर्क में नहीं आ रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इन लोगों के आपसी रिश्तों पर इसके कारण कोई दुष्प्रभाव पड़ रहा है। आधुनिक तकनीक और इंटरनेट के दौर में सामाजिक दूरी रखते हुए भी लोग लगातार एक दूसरे से संपर्क में हैं।
हरदोई के शिवम और अभिनव, लखनऊ में रहने वाले सत्यम कनौजिया और रूस में रहने वाली नताशा स्तारकोवा आपस में गहरे और पुराने मित्र हैं। प्रधानमंत्री की लॉकडाउन की घोषणा का पालन हरदोई और लखनऊ में रहने वाले शिवम, अभिनव और सत्यम पूरी गंभीरता से कर रहे हैं तो रूस मे भी लगे लॉकडाउन का पालन नताशा स्तारकोवा कर रही हैं।
शिवम, अभिनव और सत्यम लॉकडाउन के दौरान एक-दूसरे से मिल नहीं पा रहे लेकिन इसे एहतियात मानते हुए तकनीकी का इस्तेमाल कर सामाजिक दूरी को इन लोगों ने खत्म सा कर लिया। दरअसल चारों आपस में वीडियो कालिंग के जरिए कनेक्ट हो जाते हैं और फिर गपशप और गंभीर मुद्दों पर चर्चा का दौर चल निकलता है। रूस में रहने वाली नताशा अपने यहां के हालात बतातीं हैं तो अभिनव यह बताने से नहीं चूकते कि प्रधानमंत्री ने सख्त कदम उठाकर कोरोना संक्रमण से देशवासियों को बचाने में कसर नहीं छोड़ी।
हरदोई में पिहानी के रहने वाले प्रगतिशील किसान सैय्यद अम्मार जैदी भी लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। उनका भांजा अली हादी ऑस्टे्रलिया में रहता है। अम्मार का पहले से ही अप्रैल में ऑस्टे्रलिया जाने का कार्यक्रम था, लेकिन साल के शुरूआती दिनों में ही विश्व के अलग-अलग देशों में कोरोना संकट के चलते उन्होंने अपना कार्यक्रम निरस्त कर दिया। शुरूआत में भांजे ने नाराजगी जताई, लेकिन अब वीडियो कालिंग से हर रोज अम्मार और उनके भांजे अली हादी के बीच बातचीत हो रही है और इस बातचीत के जरिए अम्मार अपने भांजे की नाराजगी दूर करने में भी सफल रहे हैं।
हरदोई के बाबा मंदिर के निकट रहने वाले रूपेश दीक्षित की बहन वर्णिका मिश्रा यूं तो लखीमपुर की रहने वाली हैं, लेकिन एक बैंक में तैनाती होने के कारण वर्णिका शाहजहांपुर में रह रही हैं। वैसे सामान्य दिनों में रूपेश का एक चक्कर शाहजहांपुर अपनी बहन के पास लग जाता था, लेकिन लॉकडाउन के चलते वह अपने घर में ही हैं, ऐसे में इंटरनेट और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से वह अपने रिश्ते को और मजबूती दे रहे हैं। हर रोज वह अपनी बहन से वीडियो कालिंग करते हैं और साथ ही साथ कोरोना से बचने के लिए सावधानी बरतने की नसीहत देना भी नहीं भूलते।