कानपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को लेकर लोग परेशान हैं। कहीं एक ही परिवार में चार सदस्य हैं तो वहां बीएलओ दो ही सदस्य का गणना प्रपत्र देकर लौट जा रहे हैं। कई घरों में बीएलओ गणना प्रपत्र तो पहुंचा दे रहे लेकिन निर्वाचन आयोग की ओर से तय आधार वर्ष 2003 की मतदाता सूची में मतदाता या उनके संबंधी किस विधानसभा के कौन सी भाग संख्या और क्रम संख्या पर वोटर थे, इसकी जानकारी नहीं दे रहे। इसे तलाशने में सबसे अधिक परेशानी अशिक्षित लोगों को हो रही है।
जिले की 10 विधानसभा में कुल 3538261 मतदाता हैं। इसमें 35.31 लाख गणना प्रपत्र बंट चुके हैं। अभी तक 2357 प्रपत्र वापस जमा हुए हैं। अभी कई मतदाता अपना गणना प्रपत्र ही नहीं भर पा रहे हैं। लोग बीएलओ, प्रधान और पार्षदों के चक्कर लगा रहे हैं। जूही निवासी नितिन कुमार के परिवार में छह सदस्य हैं लेकिन अभी तक चार लोगों का ही गणना प्रपत्र घर पहुंच पाया है।
गणेशनगर के रहने वाले अनमोल, प्रिया का भी अभी तक गणना प्रपत्र नहीं पहुंचा जबकि पारिवार के चार लोगों का प्रपत्र पहुंच गया है। मसवानपुर निवासी संदीप को इस सवाल का जवाब नहीं मिल रहा यदि किसी मतदाता का नाम 2003 की सूची में नहीं है और उसके माता-पिता, दादा, दादी का निधान हो चुका है तो वह आवेदन पत्र में संबधी वाले काॅलम में क्या भरेंगे।
2003 की सूची में नाम नहीं तो देना होगा एक पहचान पत्र
जिनके नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं दर्ज हैं, वे नौ दिसंबर से आठ जनवरी तक के बीच बीएलओ के पास या ऑनलाइन आयोग की ओर से जारी 13 पहचान पत्रों के विकल्पों में से कोई एक जमा करा सकते हैं। यदि किसी को नोटिस जारी हुआ है तो उसका निस्तारण ईआरओ करेंगे।