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Kanpur News: 15 अपात्रों को आवास देने वाले वीडीओ को पीडी ने किया बहाल

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कानपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना में 15 अपात्रों को आवास देने के आरोपी निलंबित ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) मनोज कुमार वर्मा को बहाल कर दिया गया है। खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) सरसौल निशांत राय ने चार माह बाद मामले की दोबारा जांच में मनोज को सिर्फ छह अपात्रों को मकान देने का दोषी बताया। इस रिपोर्ट को सही मानकर परियोजना निदेशक (पीडी) आलोक कुमार ने वीडीओ को सवेतन बहाल कर कल्याणपुर ब्लाक में तैनाती दे दी। इससे तत्कालीन पीडी के आदेश पर चार माह पहले शिवराजपुर थाने में दर्ज एफआईआर झूठी साबित हो गई। मामले में चार्जशीट लगनी बाकी है।
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शिवराजपुर ब्लाक के निवादा मवई गांव के रहने वाले जितेंद्र सिंह राजपूत ने वीडीओ मनोज वर्मा पर अपात्रों को आवास देने का आरोप लगाकर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह से शिकायत की थी। डीएम ने तत्कालीन पीडी पीएन दीक्षित से मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। पीडी ने बीडीओ आशीष मिश्रा से जांच कराई तो करीब 15 अपात्रों का आवास देने का मामला पाया। सीडीओ ने वीडीओ को निलंबित कर दिया। साथ ही बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने पर सीडीओ ने मनोज वर्मा के खिलाफ शिवराजपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चार माह बीतने के बाद जिले में नए परियोजना निदेशक आलोक कुमार की तैनाती हुई। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश पर वीडीओ के मामले की दोबारा जांच सरसौल बीडीओ निशांत राय से कराई। इसमें उन्होंने 15 आवासों से घटाकर छह आवास अपात्रों को देना बताया। उसी रिपोर्ट के अनुसार पीडी ने वीडीओ को सवेतन बहाल कर दिया। इससे यह साबित होता है कि तत्कालीन अधिकारी की जांच रिपोर्ट और थाने में दर्ज रिपोर्ट झूठी थी। वहीं परियोजना निदेशक आलोक कुमार से इस बहाली के बारे में पूछा गया तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए।

निलंबन के दौरान 15 अपात्रों को आवास देने का दोषी पाया था। अगर अब बीडीओ ने छह आवास जांच रिपोर्ट में दिखाए तो गलत है। अपात्रों की संख्या कम होने से दोष खत्म नहीं हो जाता। गलत जांच रिपोर्ट बनाकर अगर बहाली हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
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दीक्षा जैन, सीडीओ
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