यूपी के कानपुर में विश्व रक्तदाता दिवस पर सिस्टम पर सवाल उठाता एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां के हैलट हॉस्पिटल में एक मरीज सवा दो घंटे तक खून न मिलने से तड़पता रहा और फिर जब खून आया तब तक उसकी जान जा चुकी थी।
गंगाघाट निवासी राम सनेही का बेटा धर्मेंद्र (22) उन्नाव रेलवे स्टेशन में ट्रेनों में समोसे बेचता था। बुधवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे ट्रेन में चढ़ते समय पैर फिसलने से वह ट्रैक पर गिरा और उसी गाड़ी से उसके दोनों पैर कट गए। वह वहीं तड़पने लगा। साथियों ने लहूलुहान हालत में उसे उठाकर प्लेटफार्म पर लिटाया। जीआरपी की मदद से उसे उन्नाव जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां से 108 एंबुलेंस से उसे दोपहर करीब 12 बजे हैलट इमरजेंसी लाया गया। हड्डी विभाग में डॉ. अजय भारती की यूनिट ने तुरंत उसका उपचार किया।
जूनियर डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए तुरंत ब्लड लाने के लिए कहा। ईएमओ डॉ. विनय ने उसे फ्री ब्लड देने की संस्तुति करते हुए फार्म सहित धर्मेंद्र के पिता को मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक भेजा। तीमारदार मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक गए, पर उन्होंने ईएमओ के आदेश पर ब्लड देने से इनकार कर दिया। तीमारदारों के अनुसार वे दोबारा ईएमओ के पास गए। इस प्रकार इमरजेंसी और ब्लड बैंक के तीन चक्कर लगाए। इस बीच अत्यधिक खून बहने से उसकी हालत बिगड़ने लगी। ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. लुबना खान से आग्रह करने के बाद ढाई बजे ब्लड मिला, पर तब तक धर्मेंद्र की मौत हो गई थी।