कानपुर देहात। लाखों-करोड़ों रुपये का बजट खर्च कर सड़कों को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन गुणवत्ता के नाम पर काम जीरो है। कानपुर-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग पर एनएचएआई के पैचवर्क की हकीकत यही बयां कर रही है। रायपुर से लेकर बारा जोड़ तक करीब एक महीना पहले किया गया पैचवर्क उखड़ गया है। दो दिनों से हो रही बारिश ने निर्माण कार्य की कलई और खोल दी है।
रायपुर से बारा जोड़ के बीच करीब 15 किलोमीटर के क्षेत्र की संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शनिवार को पड़ताल की। पड़ताल में स्थिति बेहद चिंताजनक मिली। पैचवर्क उखड़ने से हाईवे पर बजरी बिखर गई है। जो अब राहगीरों और वाहन चालकों के लिए हादसे का कारण बनी हुई है। हाईवे पर जहां-तहां पैचवर्क की बजरी बिखरी होने से वाहन जब तेज रफ्तार में गुजरते हैं तो ये बजरी उछलकर पीछे या बगल से आ रहे वाहनों पर लगती है। सबसे बुरा हाल दोपहिया वाहन चालकों का है। गड्ढों से बचने के चक्कर में जैसे ही वे साइड लेते हैं बजरी पर बाइक या स्कूटी अनियंत्रित होकर रपट जाती है। ऐसे में पीछे से आने वाले तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से कभी भी दुर्घटना हो सकती है।
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मानक दरकिनार, डामर का नाम, गिट्टी का काम
रायपुर के सुभाष दीक्षित व सिरोमणि सिंह चंदेल ने बताया कि करीब एक महीने पहले एनएचएआई की तरफ से हाईवे के गड्ढों को भरने का काम किया गया था। पैचवर्क के दौरान मानकों की जमकर अनदेखी की गई। डामर (बिटुमिन) की मात्रा बेहद कम रखी गई और गिट्टियों को सही तरीके से रोलर चलाकर दबाया नहीं गया। यही वजह रही कि जैसे ही वाहनों का दबाव बढ़ा और बारिश का पानी पड़ा। डामर ने पकड़ छोड़ दी और गिट्टियां सड़क पर फैल गई हैं। अब यह बिखरी गिट्टी हादसे का कारण बन सकती है।
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रात के अंधेरे में और बढ़ जाती जोखिम
रनियां निवासी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि इस हाईवे से चौबीसों घंटे भारी वाहनों (ट्रक, ट्रेलर और बसें) का आवागमन रहता है। रात के समय बारा जोड़ से रायपुर के बीच स्थितियां और खौफनाक हो जाती हैं। तेज रफ्तार में अचानक सामने बिखरी गिट्टी या गड्ढा आने पर वाहन चालक आपातकालीन ब्रेक लगाते हैं, इससे पीछे से आ रहे भारी वाहनों के टकराने का अंदेशा हर पल बना रहता है।
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राहगीरों का छलका दर्द, जिम्मेदारों पर उठे सवाल
रनियां के नितिन कुशवाहा ने कहा कि एक महीना भी नहीं हुआ जब यहां काम हुआ था। देखकर ही लग रहा था कि काम में लीपापोती की जा रही है। अब गिट्टियां उछलकर राहगीरों के मुंह और गाड़ियों के शीशों पर लग रही हैं। रोज बाइक से ड्यूटी के लिए निकलना पड़ता है। पैचवर्क के बाद लगा था कि सफर आसान होगा लेकिन अब तो डर और बढ़ गया है। गाड़ी जरा सी भी अनियंत्रित हुई तो हाथ-पैर टूटना तय है।
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सीन-1
बाराजोड़, समय सुबह 10:15 बजे
कानपुर की तरफ से आने के दौरान टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर आगे बढ़ते ही हाईवे पर बजरी बिखरी नजर आई। इसे देखकर ही पता चल रहा था इससे पहले पैचवर्क कर मरम्मत का काम किया गया है। बारिश होने और भारी वाहनों का दबाव पड़ने के कारण दोबारा से गड्ढे हो गए हैं जबकि यहां से गुजरने से वाले वाहन इनसे बचकर निकलते रहे।
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सीन-2
रनियां, समय सुबह 11:00 बजे
अकबरपुर से कानपुर की तरफ चलने पर रनियां के पास हाईवे की स्थिति सबसे ज्यादा खराब नजर आई। यहां पहुंचने पर हाईवे की सड़क कम और गड्ढे ज्यादा नजर आए। स्थिति यह रही कि पैचवर्क के लिए डाली गई बजरी रनियां ओवरब्रिज से लेकर थाने तक फैली हुई थी जबकि यहां औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से बड़ी संख्या में लोग सुबह आते व शाम को वापसी करते हैं।
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सीन-3
रायपुर, समय सुबह 11:30 बजे
रनियां से आगे बढ़ने पर रायपुर के विसायकपुर पहुंचने पर कई स्थानों पर गड्ढे व फैली हुई गिट्टी नजर आई। जबकि पीछे से आने वाले वाहन इनसे बचकर निकलते रहे। तभी दो बाइक सवार बारिश होने के दौरान तेज गति से आते हुए दिखाई दिए। अचानक गड्ढा देखकर उसने ब्रेक लगाई और गिरते-गिरते बचा। ऐसे में कभी भी हादसा हो सकता था।
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बयान...
लगातार हो रही बारिश से पानी के संपर्क में आने के कारण बिटुमिन खराब होने से बजरी उखड़ गई है। इससे पैचवर्क से बंद किए गए गड्ढे दोबारा से हो गए हैं। बारिश बंद होते ही दोबारा से इसकी मरम्मत कराई जाएगी। - आलोक सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई