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किराये की मार, सवारी बेहाल

Wed, 11 Feb 2015 01:18 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर देहात
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सवारी वाहनों का किराया यात्रियों का ही शोषण कर रहा है। डीजल व पेट्रोल के दामों में भारी कमी होने के बावजूद मोटर वाहन मालिकों ने किराए में अभी परिवर्तन नहीं किया।
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दैनिक यात्रियों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। यात्रियों ने वाहन संचालकों पर मनमाने तरीके से किराया वसूलने का आरोप लगाकर जिला प्रशासन से गुहार लगाई है।

बढ़े किराए की मार से सवारियां बेहाल हैं। रोजाना किराए को लेकर सवारी और टैंपो चालकों में चिकचिक आम बात हो गई है। सवारियां खुले तौर पर टैंपो संचालकों पर मनमाना किराया वसूलने का आरोप लगा रही हैं।
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सवारियों का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने पर किराया तो बढ़ा दिया। लेकिन अब 18 रुपये तक दाम गिरने पर किराया कम क्यों नहीं है।

रूरा से शिवली अप-डाउन कर रही शिक्षिका संगीता बताती हैं कि डीजल के दाम 68 रुपये तक पहुंचने से किराया 25 रुपये देने पड़ रहे थे। अब डीजल के दाम भी कम हो गए हैं।

मोटर वाहन चालक उनसे 25 रुपये ही वसूल रहे हैं। सुनील कुमार गुप्ता का कहना है कि वह डेरापुर से रूरा रोजाना जाते हैं। उन्हें 20 रुपये किराया देना पड़ रहा है।

पहले यह किराया 15 रुपये था, अब डीजल के दाम भी कम हैं तो किराया कम क्यों नहीं। शिक्षक मनोज कुमार कहते हैं कि वह अकबरपुर से सिकंदरा रोजाना अप-डाउन करते हैं। उन्हें रोजाना 30 रुपये देने पड़ते हैं।

पहले जब डीजल सस्ता था। तब 20 रुपये देते थे। डीजल बढ़ा तो किराया बढ़ाया, अब डीजल घटा तो किराया कम नहीं कर रहे हैं। उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। 

मनोज कुमार (एआरटीओ, प्रशासन) ने बतायाकि वाहनों किराये की दी मंडलायुक्त स्तर पर तय होती है। संभागीय परिवहन इसका सचिव होता है। उन्हीं के स्तर से किराए की पुर्नसमीक्षा की जाती है। फिलहाल किराए में संशोधन का कोई आदेश नहीं मिला है।
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