फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur News: पुरवामीर में दहशत... पानी में 36 प्रतिशत क्रोमियम

विज्ञापन
विज्ञापन
कानपुर। क्रोमियम युक्त कचरा फेंके जाने के कारण पुरवामीर गांव के इर्द-गिर्द सहित फतेहपुर जिले के पांच गांवों के हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। यहां पानी में 36 और सॉलिड वेस्ट में 37 प्रतिशत क्रोमियम मिला है। इससे लगभग छह किलोमीटर के दायरे की तकरीबन 30 हजार लोगों की आबादी प्रभावित हुई है। इससे पुरवामीर के लोग दहशत में हैं।
विज्ञापन

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने चिह्नित पांच गांवों के हैंडपंप पर लाल रंग का निशान लगाकर लिखा है कि इसका पानी पीने योग्य नहीं है। इन गांवों के लोग अब पीने के पानी के लिए टैंकर के सहारे हैं। वहीं, कचरे की जांच के लिए लखनऊ स्तर पर गठित टीम मंगलवार को जांच के लिए आएगी।
महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर गांव निवासी राजेश पाल के खेत के समीप 18 जुलाई की सुबह हरे रंग का कचरे का ढेर लगा मिला था। ग्रामीणों ने कचरा क्रोमियम युक्त होने की आशंका जताई तो पुलिस-प्रशासन की टीम और फिर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी पहुंचे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कचरे और उसके समीप बहने वाले पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा। जांच में सामने आया कि कचरे और पानी में हानिकारक क्रोमियम मौजूद है। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने पुरवामीर से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित फतेहपुर के छिवली, आशापुर, अभयपुर, गोधरौली और बनियाखेडा गांव के हैंडपंप पर लाल निशान लगाकर पानी पीने योग्य न होना बताया।
विज्ञापन

ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में लगभग दो दशक से कारखाने संचालित थे। वर्ष 2023 से हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप का पानी पीला आने लगा तो शिकायत की गई। एनजीटी ने संज्ञान लिया तो कारखाने बंद हुए लेकिन पानी की स्थिति में सुधार नहीं आया। छिवली सहित पांच अन्य गांवों के हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप की स्थिति देख कर अब पुरवामीर गांव के लोग भी सहमे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तीन किलोमीटर दूर छिवली का भूगर्भ जल प्रदूषित हो सकता है तो यहां की स्थिति भी जल्द खराब हो सकती है।
अब तक सात जगह मिला क्रोमियमयुक्त कचरा
महाराजपुर क्षेत्र में अब तक सात जगह पर क्रोमियम युक्त कचरा पड़ा होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद उसके निस्तारण का प्रबंध नहीं किया जा सका है।

टीम जांच कर तय करेगी कि किस कंपनी ने कचरा फेंका
पुरवामीर गांव में मिले मलबे में क्रोमियम पाया गया है। इसके निस्तारण के लिए लखनऊ मुख्यालय स्तर से एक जांच कमेटी बनाई गई है जो मंगलवार को आएगी। टीम जांच कर तय करेगी कि किस कंपनी ने कचरा फेंका है। इसके साथ ही जो भी कंपनी दोषी मिलेगी उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कचरे के निस्तारण का खर्च भी वही कंपनी ही वहन करेगी। - अजीत कुमार सुमन, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड।

हेक्सावेलेंट क्रोमियम सबसे ज्यादा विषैला
क्रोमियम के दो मुख्य रूप क्रोमियम ट्राइवैलेंट और हेक्सावेलेंट हैं। इसमें हेक्सावेलेंट क्रोमियम सबसे विषैला होता है। इसके साइड इफेक्ट्स काफी होते हैं। यह पानी में जाता है तो जलीय जीव-जंतु, मिट्टी में जाता है तो पेड़ पौधों और हवा में जाने से मनुष्यों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाता है। लेदर इंडस्ट्री द्वारा बिना ट्रीटमेंट के कचरा बहाने से यह भूजल में घुलकर उसे जहरीला बना देता है। दूषित पानी का लंबे समय तक सेवन करने से पेट दर्द, त्वचा रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यह पौधों की वृद्धि रोकता है और फसलों की सिंचाई के जरिये ये हमारे भोजन तक पहुंच जाता है। सी-फूड के जरिये ये इंसानों में पहुंचकर अगली पीढ़ी के लिए भी बड़ा खतरा बनता है।- डॉ. द्रौपदी यादव, कोऑर्डिनेटर, पर्यावरण विज्ञान विभाग, स्कूल ऑफ बेसिक साइंस, सीएसजेएमयू।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें