फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शरई पंचायत ने तीन तलाक को गलत और गुनाह करार दिया

Thu, 30 Mar 2017 12:43 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
मौलाना अतीक अहमद कासमी से शरई पंचायतों के संबंध में सवाल पूछते लोग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की शरई पंचायत (दारुल कजा) अब बांदा में होगी। इसका एलान यहां बोर्ड संयोजक ने किया। बुंदेलखंड में यह बोर्ड की पहली शरई पंचायत होगी। बोर्ड सदस्यों का कहना है कि इस व्यवस्था से देश की विभिन्न अदालतों में चल रहे मुकदमों में कमी आएगी। बुधवार को हथौरा स्थित विश्वविख्यात मदरसा जामिया अरबिया में बोर्ड के दारुल कजा (शरई पंचायत) संयोजक मौलाना अतीक अहमद कासमी ने उत्तर प्रदेश की 15वीं शरई पंचायत शुरू करने की घोषणा की। उन्हाेंने कहा कि इन पंचायतों को अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए। मुस्लिम या किसी अन्य संप्रदाय के लोग अपने विवाद या मामले अपने धर्म के मुताबिक निपटाना चाहते हैं तो इसमें आखिर हर्ज क्या है। इससे अदालतों का बोझ कम होगा और लोगों का पैसा व समय बचेगा। शरई पंचायतों में मुस्लिमों के सभी मसलक (वर्ग) के लोग शामिल हैं। पंचायत शरीयत के मुताबिक फैसले करेगी। इसमें देश की किसी भी अदालत को कोई आपत्ति नहीं है। न ही यह अदालतों के समकक्ष है। उन्होंने कहा कि शरई कानून पर चलने वालों पर किसी को एतराज नहीं होना चाहिए। नफरत से मुल्क पीछे जाएगा। मौलाना ने मीडिया को सलाह दी कि सही सूरत पेश करें। बैठक का संचालन मौलाना मसर्रत (हथौरा) ने किया। मौलाना मुफ्ती उबैदुल्ला (सचिव इस्लामिक फिकह एकेडमी), काजी तबरेज आलम (दारुल कजा), काजी अंजार आलम, नायब काजी (अमारत शरई, पटना, बिहार) आदि ने अपने विचार रखे। मदरसा संचालक मौलाना मुफ्ती कारी हबीब अहमद समेत मुफ्ती नजीब अहमद आदि ने सभी की अगवानी की। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों समेत विभिन्न जनपदों और राज्यों के नुमाइंदे शामिल रहे। मौलाना कासमी ने लोगों के सवालों के जवाब भी दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक साथ तीन तलाक कहना गैर शरई

पर्सनल लॉ बोर्ड की विशेष बैठक में शामिल नुमाइंदे
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में दारुल कजा (शरई पंचायत) के राष्ट्रीय संयोजक मौलाना अतीक अहमद कासमी ने तीन तलाक को गलत और गुनाह करार दिया है। उन्होंने कहा कि बहुत ही मजबूरी के हालत में तलाक जरूरी हो तो सिर्फ एक बार तलाक का लफ्ज बोलना चाहिए। एक बार में तीन मर्तबा तलाक कह देने से आगे सुलह का रास्ता बंद हो जाता है। शरई ने इसको गुनाह भी बताया है। शरई पंचायतों के बारे में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि यह कोई नया कदम नहीं है। मुस्लिम वर्ग के लोग जब कारोबार के सिलसिले में भारत आए तो यहां की सत्ता संभाले हिंदू राजाओं से अनुरोध किया कि उन्हें अपने मजहबी मामले निपटाने के लिए अपनी शरई पंचायत (दारुल कजा) कायम करने की अनुमति दी जाए। हिंदू राजाओं ने बखुशी इसे मंजूरी दे दी। लेकिन बाद में सन 1864 में अंग्रेजी शासन काल में अंग्रेजों ने इसे खत्म कर दिया। बोर्ड के दारुल कजा कनवीनर मौलाना अतीक अहमद कासमी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसकी पूरी पैरवी करता है कि किसी धर्म या मजहब के लोग अगर अपने तौर तरीके से शादी ब्याह करते हैं तो इससे मुल्क को कोई खतरा नहीं हो सकता। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें