एक परिवार ने मांगी थी अनुमति
इनका वीजा दिल्ली और आसपास का है। इन लोगों ने अपना ठिकाना बदलने की कोई सूचना उच्चायुक्त को नहीं दी है, जो नियमों के अनुसार गलत है। सूत्र बताते हैं कि कमलेश पटेल के कहने पर एक परिवार उच्चायुक्त को बिना सूचना दिए चित्रकूट चला आया, जबकि दूसरे परिवार ने चित्रकूट आने से एक दिन पूर्व ही दिल्ली में अनुमति मांगी थी।
लखनऊ और दिल्ली के उच्चायुक्त को भेजी है रिपोर्ट
लेकिन जांच रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया और वह भी उसी परिवार के साथ चला आया है। उधर, सोमवार को लोकल इंटेलीजेंस यूनिट और स्पेशल इंटेलीजेंस यूनिट टीम के अधिकारियों ने चित्रकूट पुलिस के साथ जांच पड़ताल की। दिल्ली से मंगाए गए कागजातों की जांच हुई। इसकी रिपोर्ट लखनऊ और दिल्ली के उच्चायुक्त को भेजी है।
विदेशी फंडिंग की भी जांच
पाकिस्तान के परिवारों को बिना अनुमति चित्रकूट लाकर ठहराने वाले संग्रामपुर के कमलेश पटेल के मोबाइल की जांच पुलिस और खुफिया विभाग करा रहा है। अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल आने पर यह भी शक और भी गहरा गया है कि कहीं यह विदेशी फंडिंग का मामला तो नहीं है। कमलेश कुछ स्थानीय मठों से भी जुड़ा है। इसलिए जांच जारी है।
पाकिस्तानी परिवारों के बारे में उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई थी, लेकिन वहां से अभी कोई निर्देश नहीं आए हैं। इन परिवारों ने वीजा नियमों का उल्लंघन किया है। इसकी गहनता से जांच की जा रही है। विदेशी फंडिंग व अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल के मामले की भी जांच इसी में शामिल है। -वृंदा शुक्ला, एसपी चित्रकूट