यह है मरीजों के परिजनों की व्यथा
बताया कि लगातार हमें बीमार पति को एक मेडिकल स्टोर पर बुलाया करता था। दवाई का पर्चा लिखा करता था। दवाई भी वहीं मिलती थी। जब हम कानपुर में पति को दिखाने गए, तो वहां जांच के दौरान पता चला कि नॉन एमआई पेसमेकर डला है। काफी शिकायत की, लेकिन हमारे विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक नहीं सुनी।
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी हुई है शिकायत
पति का इलाज करते- करते हम साहूकारों के कर्जदार हो गए, लेकिन पति आज भी बीमार हैं। डॉक्टर की गिरफ्तारी पर खुशी मिली। कहा कि न जाने उसने हम जैसे न जाने कितने परिवार उसने बर्बाद किए होंगे। गत 20 दिसंबर 2017 को मरीज दिनेश चंद्र के परिजनों ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल शिकायत संख्या 60000170119949 पर की थी। इसमें डॉ. समीर सर्राफ के विरुद्ध लापरवाही बरतने और मरीज की मौत होने की शिकायत की थी।
अनुचित कीमत के संदर्भ में शिकायत दर्ज की गई
विवाद बढ़ने पर मौखिक शिकायत तत्कालीन कुलपति बिग्रेडियर टी. प्रभाकर और पूर्व चिकित्सा अधीक्षक एसके गुप्ता से भी की गई थी। मरीज रामप्रकाश ने मुख्यमंत्री पोर्टल जनसुनवाई संख्या 40016118007830 को नौ मई 2018 को डॉ. समीर सर्राफ के विरुद्ध पेसमेकर के अनुचित कीमत के संदर्भ में शिकायत दर्ज की गई।
मरीज ने गुंडागर्दी कर गालियां देने के संबंध में शिकायत की
12 अगस्त 2019 में करहल निवासी मरीज उमाकांत बाथम ने डॉ. समीर सर्राफ के विरुद्ध ओपीडी में गुंडागर्दी कर गालियां देने के गलत व्यवहार के संबंध में लिखित शिकायत की थी। इटावा के दीपक कुमार ने 18 जून 2019 को डॉक्टर के खिलाफ बेवजह मारने पीटने की शिकायत की थी। 31 जनवरी 2019 को मरीज सुदामा के परिजनों ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र में डॉ. समीर ने गलत पेसमेकर लगाकर अधिक धनराशि वसूलने की शिकायत की थी।