कानपुर में सीबीआई ने आजाद नगर निवासी हीरा कारोबारी उदय देसाई के 3595 करोड़ रुपये के कर्ज धोखाधड़ी मामले में मंगलवार को उनके छह ठिकानों पर रात भर जांच की। इसमें उनकी कंपनी मैसर्स फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड के अन्य निदेशकों को भी शामिल किया गया।
सभी के पारिवारिक सदस्यों, आवास और दफ्तरों के कर्मचारियों से पूछताछ हुई। घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर मिले मोबाइल फोन, बिजनेस से जुड़े लैपटॉप, कंप्यूटर आदि जब्त कर लिए गए।सूत्र बताते हैं कि सीबीआई अफसरों ने फ्रास्ट इंटरनेशनल के एक अन्य निदेशक सुनील वर्मा के घर से भी कुछ जरूरी दस्तावेज जब्त किए हैं।
इसमें कुछ कागजात विदेशी निवेश से भी संबंधित हैं। सीबीआई की टीम अब सभी निदेशकों की संपत्तियों, उनके निवेश, घर के सभी कीमती सामान आदि का भी मूल्यांकन कर रही है। आरोपियों के विदेश भागने की आशंका में सीबीआई ने उनके देश छोड़ने पर रोक लगा दी है।
बुधवार सुबह सीबीआई के 10 से ज्यादा अफसर दस्तावेजों को लेकर दिल्ली लौट गए। चार सदस्यीय टीम अभी कानपुर में ही रुकी है। यह टीम दिल्ली से मिले निर्देशों के मुताबिक संबंधित प्रतिष्ठानों से सबूत जुटाएगी।
20 घंटे में चार बार पहुंची बैंक
सीबीआई की एक टीम जांच के 20 घंटों में बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में चार बार पहुंची। हर बार कुछ नए दस्तावेजों की मांग की गई। बैंक ने उपलब्ध सभी दस्तावेजों की फोटोकॉपी सीबीआई को सुपुर्द कर दी।
13 ठिकानों पर पड़ा था छापा
सीबीआई ने मंगलवार सुबह नौ बजे उदय देसाई और उनके बेटे सुजॉय देसाई के देश भर में 13 ठिकानों पर छापा मारा था। इनमें कानपुर में छह, दिल्ली में तीन और मुंबई में चार प्रतिष्ठान थे। बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर देसाई के खिलाफ बैंकिंग फ्रॉड का केस दर्ज हुआ है।
इन बैंकों का बकाया
बैंक ऑफ इंडिया- 606 करोड़
बैंक ऑफ बड़ौदा- 526 करोड़
सेंट्रल बैंक- 388 करोड़
इंडियन ओवरसीज बैंक 353 करोड़
इलाहाबाद बैंक- 286 करोड़
पंजाब नेशनल बैंक- 282 करोड़
यूको बैंक- 243 करोड़
ओरिएंटल बैंक- 217 करोड़
यूनाइटेड बैंक 187 करोड़
यूनियन बैंक 167 करोड़
केनरा बैंक- 145 करोड़
सिंडीकेट बैंक- 102 करोड़
विजया बैंक- 86 करोड़
आंध्रा बैंक- 48 करोड़