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कुल 18 रीजन, कानपुर 10 टॉप में
कानपुर रीजन देश के कुल 18 रीजनों में 10 टॉप में शामिल है। आयकर विभाग, उत्तर प्रदेश (पश्चिम) एवं उत्तराखण्ड क्षेत्र ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में प्रत्यक्ष कर संग्रह में प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है। 20 जुलाई 2026 तक शुद्ध कर संग्रह 13,181.85 करोड़ रुपये रहा। इसमें 45.66 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 14,902.67 करोड़ रुपये रहा जो गत वर्ष 2025-26 की समान अवधि की तुलना में 30.26 फीसदी अधिक है। अग्रिम कर संग्रह भी 4,237.10 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 52.71 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल शुद्ध संग्रह 46,544.15 करोड़ रुपये रहा। यह वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 13 फीसदी ज्यादा है। इसी वित्त वर्ष में दाखिल किए गए आयकर रिटर्न की संख्या बढ़कर 37,01,353 हो गई है। यह पिछले साल की तुलना में 2.3 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल कानपुर रीजन में 36,18,209 करदाता थे।
शिकायतों का तेजी से हो रहा निस्तारण
कानपुर। विभाग, करदाता सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। एक अप्रैल 2026 से 21 जुलाई 2026 की अवधि के दौरान सीपीजीआरएएम के माध्यम से 1,124 शिकायतों का निस्तारण किया गया। इसी अवधि में ई-निवारण के माध्यम से 2,929 शिकायतों का समाधान किया गया है। कुल मिलाकर 4,053 शिकायतों का निपटारा किया गया है।
एक अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 प्रभावी हो गया है जो कर प्रशासन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सरकार लगातार कर सुधार की दिशा में काम कर रही है। यही कारण है कि शहर और पूरे कानपुर रीजन में कर संग्रह बढ़ रहा है। करदाता की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। -सीए, दीप कुमार मिश्रा, पूर्व चेयरमैन, सीआईआरसी
नई आयकर स्लैब व्यवस्था को लोग सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। नई आयकर व्यवस्था के तहत 12 लाख तक की आमदनी (व्यक्तिगत हैसियत करदाता) को कर जमा करने से छूट दी गई है। इसके अलावा पुरानी कर व्यवस्था को वैकल्पिक कर दिया गया है। विभाग में कामकाज आसान हो गया है। स्क्रूटनी, रिफंड की प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी हो गई है। -आशीष गुप्ता, वरिष्ठ कर अधिवक्ता
अर्थव्यवस्था बेहतर हो रही है। इसका असर कर संग्रह के तौर पर दिख रहा है। आय छिपाने के रास्ते सरकार लगातार बंद कर रही है। लोग भी जागरूक हो रहे हैं। आयकर जमा कर रहे हैं। जो लगातार हो रहा है। आयकर के रिटर्न सरल कर दिए गए हैं। खर्च और आय की जानकारी विभाग को मिल रही है। -डॉ. एस मनु, वरिष्ठ कर अधिवक्ता
इसलिए मनाया जाता है आयकर दिवस
कानपुर। 24 जुलाई 1860 को तत्कालीन वित्त सदस्य सर जेम्स विल्सन ने भारत में पहली बार आयकर व्यवस्था लागू की थी। यह व्यवस्था इसलिए लाई गई थी कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश शासन को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके और लोगों से कर लिया जा सके। तब से लेकर आज तक भारतीय आयकर प्रणाली ने अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे हैं। स्वतंत्रता के पश्चात लागू आयकर अधिनियम 1961 ने लगभग 65 वर्षों तक देश की प्रत्यक्ष कर व्यवस्था का आधार प्रदान किया। अब पहली अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 प्रभावी किया गया है।