तो क्या इसलिए नहीं की कार्रवाई
पीड़िता एक वीडियो सामने आया। जिसमें वह स्पष्ट रूप से आपबीती बताती सुनाई दे रही है, लेकिन पुलिस ने उसके बयान तक लेने की जहमत नहीं उठाई। बाल कल्याण समिति ने भी इस मामले में पुलिस अधिकारियों से जवाब तलब किया। तब जाकर ये सभी हरकत में आए। पूरे प्रकरण में सबसे अधिक लापरवाही भरा रवैया थानेदार का रहा है।
सीमा विवाद के खेल में थानेदार बेफिक्र रहे
यतीमखाना कर्नलगंज थाना क्षेत्र में आता है। जिस परिवार के साथ किशोरी रहती थी वह इलाका चमनगंज का था। कुछ समय तक वह बजरिया इलाके में किराए पर रहे थे। वारदात उस वक्त की है। आशंका है कि सीमा विवाद के फेर में कर्नलगंज थानेदार बलराम मिश्रा बेफिक्र हो रहे और लापरवाही बरती।
लावारिस बताकर यतीमखाना में दाखिल करवाया था
पुलिस की जांच में सामने आया कि मदरसे के शिक्षक ने जब दंपति को बुलाकर बताया था कि उनका बेटा किशोरी के साथ दुष्कर्म करता रहा है, तो ये सुनकर कथित पिता को हार्ट अटैक आ गया था। उनको यकीन नहीं हुआ कि बेटे ने ऐसी करतूत की है। इसके बाद वह मामला दबाने के लिए यतीमखाना में किशोरी को दाखिल करवा दिया, जहां पर यह बताया था कि यह बच्ची उनको लावारिस हालत में मिली है।
लखनऊ की रहने वाली है पीड़िता
पुलिस की जांच में सामने आया कि पीड़िता का परिवार मूलरूप से लखनऊ निवासी है। 2013 में उसकी मां की मौत हो गई थी, जिसके बाद पीड़िता व उसकी दोनों बहनें बांदा स्थित अपने ननिहाल में रहने आ गई थीं। 2015 में नाला रोड निवासी महबूब ने यतीमखाना की संचालिका डॉ. जरीन से बेटी गोद लेने की इच्छा जताई थी। तब इस बच्ची को वह लेकर चले आए थे। दो साल बाद महबूब के दोनों बेटे उसका शारीरिक शोषण करने लगे थे। 2021 महबूब का निधन हो चुका है।
खुद को पीड़िता का पिता साबित करने में जुटा
पीड़िता के मुताबिक उसके पिता जीवित हैं। वह लगातार उससे मिलने व घर ले जाने के प्रयास में जुटे रहे, लेकिन उनको उसका पिता मानने को कोई तैयार नहीं है। महबूब की पत्नी ने भी यतीमखाना प्रशासन से इस तथ्य को झूठ बताया था। पहले सात अगस्त और फिर 14 अगस्त को किशोरी के पिता ने यतीमखाना पहुंचकर बेटी को ले जाने की बात कही। जब मना किया गया, तो परेशान होकर किशोरी ने नस काट ली थी।