कानपुर में विभिन्न रोगों के रोगियों में स्टेम सेल थेरेपी की कामयाबी देखने के बाद अब गैंगरीन के रोगियों में इसे आजमाया जाएगा। इसी वजह से हैलट में आए गैंगरीन रोगियों के आपरेशन फिलहाल टाल दिए गए हैं, रोगियों को दवा पर रखा गया है। इसके बाद इन्हें स्टेम सेल थेरेपी दी जाएगी।
अगर अपेक्षित सफलता मिली तो गैंगरीन के रोगियों के अंग कटने से बच जाएंगे। इसके साथ ही उनकी नसों में सुधार आने से वे रोग प्रभावित अपने हाथ-पैर का सामान्य रूप से इस्तेमाल कर सकेंगे। अभी आठ गैंगरीन वाले रोगियों को स्टेम सेल थेरेपी के लिए चिह्नित किया गया है। जनवरी के तीसरे मंगलवार को उनके इलाज के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
जाड़े के दिनों में नसों में सिकुड़न आ जाने से रक्त का प्रवाह प्रभावित हो जाता है। खून का बहाव न होने से रोगियों के हाथ-पैर नीले पड़ने लगते हैं। इसके साथ ही अंग की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। इसके बाद अंग काला पड़ जाता है। सर्जन काले पड़े अंग के हिस्से को काटकर निकाल देते हैं। अगर इसे न काटा गया तो सड़न आगे बढ़ जाती है।
इसके अलावा प्रभावित अंग से निकलने वाले जहरीले तत्व (टॉक्सिंस) खून के साथ पूरे शरीर में फैल जाते हैं। लेकिन स्टेम सेल थेरेपी से उम्मीद जगी है। अगर सही समय पर थेरेपी दे दी जाए तो प्रभावित अंग में सुधार आता है। इससे अंग खराब नहीं होगा और काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हैलट के सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जीडी यादव ने बताया कि गैंगरीन के आठ रोगी आए हैं। इनके रोग ग्रस्त अंग को काटने के बजाय स्टेम सेल थेरेपी आजमाई जाएगी। इससे अभी इन्हें दवा दे दी गई है। इसके बाद इन्हें स्टेम सेल थेरेपी विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत को दिखाया जाएगा। वहीं डॉ. राजपूत ने बताया कि समय से अगर थेरेपी दे दी जाए तो रोगी को फायदा हो जाता है। अंग खराब होकर काला पड़ गया तो फिर थेरेपी बहुत काम नहीं करती।