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‘अंगदान में सऊदी व ईरान से भी पीछे हम’

Thu, 25 Feb 2016 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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चिकित्सा शिक्षा विभाग के पूर्व महानिदेशक (डीजीएमई) व नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन नई दिल्ली (नाटो) के डायरेक्टर डॉ. सौदान सिंह ने कहा कि अंगदान में भारत सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों से भी काफी पीछे है।
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सऊदी अरब के मृतकों में से 3.3 फीसदी और ईरान के 2.9 फीसदी के अंगदान होते हैं जबकि भारत में महज 0.05 फीसदी ही अंगदान होता है। भारत में हर साल दो लाख किडनी, तीस हजार लीवर और पचास हजार हार्ट की डिमांड रहती है। उपलब्धता क्रमश: छह हजार, 13 सौ और 15 है।

डॉ. सिंह युग दधीचि देहदान संस्था और नाटो के सहयोग से अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एलटी तीन में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के अंगों से कम से कम आठ लोगों को जीवन दिया जा सकता है। लोग तेजी से अंगदान और नेत्रदान का संकल्प ले रहे हैं।
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उन्होंने यूपी में अंग ट्रांसप्लांट के ज्यादा से ज्यादा सेंटर बनाने की वकालत की। कहा कि नाटो की वेबसाइट www.natto.nic.in और हेल्पलाइन नंबर 1800114770 पर अधिक जानकारी ली जा सकती है।

कहा कि ब्रेन डेड व्यक्तियों के अंगदान के लिए प्रदेश में कमेटी बनाने की जरूरत है। युग दधीचि देहदान संस्थान के प्रमुख मनोज सेंगर ने कहा कि वह कमेटी बनाने के लिए सीएम और मुख्य सचिव को पत्र लिखेंगे।

कार्यक्रम में 50 लोगों ने अंगदान की शपथ ली और नेत्रदानियों के परिजनों को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. आरसी गुप्ता, डॉ. सुनीति राज मिश्रा, डॉ. प्रदीप दीक्षित, पं. शेषनारायण त्रिवेदी, राजीव महाना, संत मिश्रा, मदन भाटिया, रवि तिवारी, राजू मिश्रा, माधवी सेंगर, प्रकाश धवन, घनश्याम शुक्ला आदि मौजूद रहे।

युवाओं की भी खराब हो रही हड्डियां
कानपुर। प्रभा फिजियोथेरेपी एंड न्यूरो स्पाइन रिहैब सेंटर बिरहाना रोड में बुधवार को फ्री फिजियोथेरेपी और बीएमडी जांच कैंप में 243 मरीजों की जांच हुई। 50 से ज्यादा आस्टियोपोरोसिस से पीड़ित मिले।

100 से ज्यादा आस्टियोपीनिया से पीड़ित मिले। वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. उमेश चंद्र मिश्रा ने कहा कि खानपान और जीवनशैली के कारण हड्डियों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। दर्द मुक्त कानपुर की थीम पर आयोजित इस कैंप में गठिया व जोड़ों का दर्द झेल रहे लोगों का विशेष रूप से इलाज किया गया।

35 साल से ज्यादा आयु वालों को हड्डियों की नियमित जांच करानी चाहिए। इस दौरान शरद कक्कड़, डॉ. सुजीत शर्मा, डॉ. दीपाली वर्मा, डॉ. वसीम, डॉ. राजेश यादव आदि मौजूद रहे।
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