सरकार ने आर्मी, एयरफोर्स, नेवी के अलावा गृह मंत्रालय के अधीन सुरक्षा बलों के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी की छूट समाप्त कर दी है। पहले से ही उत्पादन लागत को कम करने का दबाव झेल रही फैक्ट्रियों के लिए इस आदेश से मुश्किलें बढ़ेंगी।
आयुध निर्माणियों को अब रक्षा उत्पादन करने वाली निजी क्षेत्र की कंपनियों से सीधा मुकाबला करना होगा। इस आदेश को निगमीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अधीन देश भर की 41 आयुध निर्माणियां सेना के उपयोग के लिए तमाम उत्पाद बनाती हैं।
इनमें तोप, गोले, बंदूकें, पैराशूट, बुलेट प्रूफ जैकेट, टेंट, जूते, मोजे, वर्दी, माउंटेड गन समेत तमाम उत्पाद प्रमुख हैं। इसके अलावा सिविलियन के लिए रिवॉल्वर, पिस्टल और राइफल-बंदूक भी बनाई जाती हैं।
सिविलियन को बेचे जाने वाले उत्पादों पर उत्पाद शुल्क और वैट समेत अन्य कर लिए जाते हैं, जबकि रक्षा उत्पादन करमुक्त होता है।
मगर 14 मई को आयुध निर्माणी बोर्ड के फाइनेंस कंट्रोलर आरएन विश्वास ने एक सर्कुलर जारी करते हुए रक्षा उत्पादन पर मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी की छूट खत्म करने की सूचना सभी फैक्ट्रियों के महाप्रबंधकों को भेजी है।
इसमें कहा गया है कि आर्मी, नेवी, एयरफोर्स और एमएचए के अधीन सुरक्षाबलों के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों पर 12.87 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि एक अप्रैल 2015 से हुए उत्पादन पर टैक्स देना होगा।
आयुध फैक्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि फैक्ट्रियों को अब निजी क्षेत्र से सीधा मुकाबला करना होगा। ताजा फैसले से उत्पादन लागत बढ़ेगी। पहले ही फैक्ट्रियों पर यह दबाव है कि वे उत्पादन लागत कम करें।
एक्साइज ड्यूटी लगने से उत्पादन लागत बढ़ेगी। अभी तक सिविलियन के लिए बनाए जाने वाले असलहों पर टैक्स लगाए जाते थे। फैक्ट्री को अब निजी क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
- राकेश कुमार, महाप्रबंधक (फील्ड गन फैक्ट्री)