ऑनलाइन शॉपिंग एक गंभीर बीमारी केरूप में सामने आ रही है। मोबाइल में कई शॉपिंग साइट्स डाउनलोड करना और बार-बार उसको चेक करना, लोगों को कंपल्सिव बाइंग डिसऑर्डर बीमारी तक पहुंचा देती है। यह बीमारी लोगों को पैसे चोरी करने तक को मजबूर कर देती है। कानपुर शहर के मनोचिकित्सक के पास हर महीने तीन से चार केस आ रहे हैं, जिसमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। उनमें शॉपिंग करने की इस कदर लत लग जाती है कि वो खुद को कर्जदार तक बना लेती है और इससे भी अगर उनकी शॉपिंग की जरूरत पूरी नहीं होती तो वो चोरी तक करने लगती हैं। इस बीमारी से पुरुष भी ग्रसित हैं लेकिन शहर में महिलाओं के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं।
अलमारी भर जाए पर मन नहीं
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मनोचिकित्सक उन्नति कुमार बताते हैं, किसी भी सामान की जरूरत न होने पर भी ऑनलाइन या फिर बाजार से उसी सामान के इकठ्ठे कई सारे पैकेट खरीद लेना और अलमारियों में भरते जाना, एक कॉमन प्रॉब्लम ऑनलाइन शॉपिंग एडिक्शन वाले मरीजों में देखी गई है। मरीज हजारों से लेकर लाखों में मंथली ऑनलाइन शॉपिंग कर लेते हैं जिससे घर में अन्य सदस्य परेशान हो जाते हैं और झगड़े होने लगते हैं।
जेवर बेच कर खरीदारी करने लगी
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साइकेट्रिस्ट के अनुसार, स्वरूप नगर में रहने वाली एक महिला को शॉपिंग करने की इतनी ज्यादा लत लग चुकी थी कि वो घर से पैसे चोरी करने लगी थी। इससे भी जब उसकी शॉपिंग की धुन शांत नहीं हुई तो उसने अपने जेवर बेच दिए और उससे शॉपिंग करने लगी। एक नहीं उसके पास दो अलमारी भरकर कपड़े और कॉस्मेटिक हो गए थे फिर भी वो खरीदारी करती रहती। घर में झगड़े बढ़ गए तो उसके पति ने मेडिकल हेल्प ली जिसमें पता चला की वो कंपल्सिव बाइंग डिसऑर्डर बीमारी से ग्रसित है।
लोगों को नहीं पता बीमारी के बारे में
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यह बीमारी दुनियाभर में बढ़ती जा रही है। साइकेट्रिस्ट धनंजय चौधरी ने बताया कि शहर के लोगों को इस बीमारी की जानकारी ही नहीं है। जब बेवजह की शॉपिंग को लेकर घर में झगड़े होने लगते हैं और रोजमर्रा का काम बाधित होने लगता है तब जाकर लोगों को लगता है कि कुछ गंभीर बात है। कई बार पेशेंट जब डिप्रेशन की स्टेज पर जाने लगता है तब उसको मेडिकल हेल्प के लिए ले जाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से लोगों को जागरूक करने के लिए वह जल्द ही एक सेमिनार आयोजित करने जा रहे हैं।
सालभर के साबुन एक साथ खरीदे
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साइकेट्रिस्ट के अनुसार माल रोड निवासी अंजना बदला हुआ नाम ने जरूरत से ज्यादा साबुन खरीद लिए, जो कि पूरे साल केथे। यही नहीं, वह समय-यमय पर कोई ना कोई सामान ऑनलाइन खरीदती थी और बार-बार एक्सचेंज भी किया करती थी।
ये हैं लक्षण
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- शॉपिंग को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देना। जब तक शॉपिंग न कर लेना किसी अन्य काम में मन ना लगना।
- इंटरनेट या मोबाइल पास में न होने पर घबराहट होना।
- शॉपिंग के लिए घरवालों से झगड़ा करना।
- कंट्रोल करके शॉपिंग न कर पाने पर मूड खराब होना।
- चीजों को खरीदना और फिर छुपा देना।
- शॉपिंग करने के बाद बेकार में पैसे बर्बाद करने पर आत्मग्लानि होना।
बचाव के टिप्स
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- अपने परिवार की जरूरत, शॉपिंग और बजट के बीच तालमेल बैठाएं।
- समझें कि साइट्स पर लुभावने ऑफर आप की जेब ढीली कराने के लिए होते हैं।
- भले ही कुछ सामान सस्ता मिल रहा हो, अगर आप महीने भर का बजट शॉपिंग में ही खर्च कर देंगी तो बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, बिजली-मोबाइल बिल, पेट्रोल, रसोई खर्च पर इसका असर पड़ेगा।
- कंपनियां ज्यादातर उन्हीं चीजों को सस्ता देती हैं जो आउट ऑफ फैशन होने वाले होते हैं या जिनकी मांग कम होती है।
- अत्यधिक शॉपिंग से आपकी सेविंग (बचत) पर असर पड़ता है। इससे वर्तमान के साथ भविष्य की प्लानिंग भी बिगड़ सकती है।
- आए दिन शॉपिंग करने से उसका मजा भी खत्म हो जाता है। बेहतर हो जरूरत, ईवेंट्स, त्योहार या खास मौकों पर ही खरीदारी करें।